मथुरा में बोरिंग से पाइप निकालते समय हाईटेंशन लाइन में छुआ, करंट से तीन की मौत; तनाव
मथुरा के स्यारहा गांव में बोरिंग का पाइप 11 हजार केवीए हाईटेंशन लाइन से छूने के कारण हुए दर्दनाक हादसे ...और पढ़ें

बोरिंग के दौरान करंट की चपेट में आकर मृतक मजदूर।
HighLights
हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया।
जागरण संवाददाता, मथुरा। मथुरा में दर्दनाक हादसा हुआ है। तीन दिन बाद बोरिंग का काम पूरा होने पर गुरुवार शाम पांच बजे गांव स्यारहा में निकालते समय पाइप 11 हजार केवीए लाइन से छू गया। इससे दौड़े करंट से लोहे का पाइप पकड़े तीन लोगों की मृत्यु हो गई। हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव को नहीं उठने दिया। देर शाम कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। शेरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव स्यारहा में ओमप्रकाश के बेटे मोहन ने गांव के बाहर अपना मकान बनवा रखा है।
इसमें तीन दिन से पास के गांव गांगरौली निवासी 50 वर्षीय मिस्त्री मोहन और 40 वर्षीय सुल्तान काम कर रहे थे।गुरुवार को बोरिंग का काम पूरा हो चुका था। शाम पांच बजे तीनों बोरिंग से लोहे के पाइप को निकाल रहे थे। इसी दौरान पाइप ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से छू गया।
लाइन के संपर्क में आते ही तेज करंट फैल गया और पाइप को पकड़े तीनों लोगों की करंट से मौके पर ही मृत्यु हो गई। हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। सूचना पर शेरगढ़ थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
ग्राम प्रधान देवजीत ने बताया करंट लगने के तुरंत बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग के जेई भगवान सिंह, बिजलीघर दलोता को कई बार फोन किया, लेकिन आरोप है कि फोन नहीं उठाया गया। इसके बाद ग्रामीण स्वयं बिजलीघर पहुंचे और आपूर्ति को बंद कराया।
ग्रामीणों का आरोप है कि कृषि कार्य के लिए बिजली विभाग की ओर से सुबह सात बजे से दोपहर ढाई बजे तक आठ घंटे के लिए आपूर्ति दी जाती है, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण शाम पांच बजे शटडाउन खोल दिया गया। इससे करंट से तीनों की मृत्यु हुई है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए शव नहीं उठने दिया। ग्रामीणों ने मृतकों के परिवारों की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए प्रशासन से मुआवजा और कार्रवाई की मांग करने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि तीनों मृतकों के परिवारों में कमाने वाले यही लोग थे।
परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक कोई उच्चाधिकारी मौके पर पहुंचकर उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक तीनों शवों को उठाने नहीं दिया जाएगा।
