मथुरा, जासं। फर्जी शिक्षकों को पदभार ग्रहण कराने में प्रधानाध्यापक दोषी हैं या नहीं, इसकी जांच कछुआ गति से चल रही है। करीब 86 प्रधानाध्यापक अंतरिम बहाली पर काम कर रहे हैं, लेकिन विभाग जांच के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। निलंबित बेसिक शिक्षक संघर्ष समिति मांग कर रही है कि इस प्रकरण की जांच कर बहाली दी जाए।

पिछले वर्ष मथुरा में फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाला सामने आया था। इसमें फर्जी शिक्षकों को पदभार ग्रहण कराने में 86 प्रधानाध्यापक पिछले वर्ष जून में निलंबित किए गए थे। प्रधानाध्यापकों ने दावा किया कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों के आदेश पर ही पदभार ग्रहण कराए थे, वह निर्दोष हैं। जब विभाग ने जांच में ढीला रवैया अपनाया तो निलंबित बेसिक शिक्षक संघर्ष समिति गठित कर आवाज बुलंद की गई। आंदोलन करने पर इसी वर्ष मार्च में सभी को अंतरिम बहाली दी गई और मार्च में ही जांच पूरी कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन अभी तक यह जांच अधर में लटकी पड़ी है।

विभाग यह तय नहीं कर पा रहा है कि प्रधानाध्यापक दोषी हैं या नहीं। माना जा रहा है कि जांच में कुछ अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं, इसलिए जांच में ढीला रवैया अपनाया जा रहा है।

निलंबित बेसिक शिक्षक संघर्ष समिति ने सोमवार को बीएसए चंद्रशेखर से मुलाकात कर जांच कराकर बहाल करने की मांग की है। सात में दिन में जांच न होने पर आंदोलन किया जाएगा। कोषाध्यक्ष ब्रजभूषण का कहना है कि जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। प्रधानाध्यापक जांच में सहयोग करने को तैयार हैं। बीएसए चंद्रशेखर ने जांच जल्द कराने का आश्वासन दिया है। सुनील, सतपाल, लोकेश गोस्वामी, वेद प्रकाश, सत्यप्रकाश, गोपाल आदि ने जांच कराने की मांग की है।

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Posted By: Jagran

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