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सती का है श्राप...इस गांव में नहीं महिलाएं नहीं मनातीं करवाचौथ; अहोई अष्टमी का व्रत रखना भी मना

By Virendra Kumar Verma Edited By: Prateek Gupta
Published: Mon, 26 Oct 2026 11:57 PM (IST)

मथुरा के सुरीर गांव में एक सदियों पुरानी परंपरा के चलते महिलाएं करवाचौथ और अहोई अष्टमी का व्रत नहीं रखती ...और पढ़ें

AI जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

AI जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

अभय गुप्ता, सुरीर (मथुरा)। भले ही देश इक्कीसवीं सदी की ओर छलांग लगा रहा है लेकिन रुढ़िवादी विचारधारा से समाज का एक वर्ग अभी भी उबर नहीं पा रहा है। यही वजह है कि सुरीर के एक मोहल्ला में सती के श्राप की बंदिश के चलते महिलाएं सुहाग और संतान सलामती के करवाचौथ और अहोई अष्टमी का त्योहार नहीं मनाती हैं। उन्हें त्योहार मनाने पर सती मैया के नाराज होने का डर रहता है।

बुजुर्गों का कहना है कि बात सैकड़ों वर्ष पुरानी है जब नौहझील के गांव रामनगला का ब्राह्मण युवक यमुना पार ससुराल से अपनी नवविवाहित पत्नी को विदा करा भैंसा बग्गी से घर लौट रहा था। रास्ता में सुरीर के मोहल्ला वघा में ठाकुर जाति के कुछ लोगों ने उनकी बग्गी में जुते भैंसे को लेकर विवाद हो गया था। जिसमें सुरीर के इन लोगों के हाथों गांव रामनगला के ब्राह्मण युवक की मृत्यु हो गई थी।

अपने सामने पति की मृत्यु से कुपित पत्नी मुहल्ले के ठाकुर लोगों को श्राप देते हुए सती हो गई थी। इसे सती का श्राप कहें कि पति की मृत्यु से बिलखती पत्नी के कोप का कहर। इस घटना के बाद मुहल्ले पर काल बन कर टूटे कहर ने जवान युवकों को ग्रास बनाना शुरू कर दिया। तमाम विवाहिता असमय विधवा हो गई थीं। मुहल्ले में मानों आफत की बरसात हो रही थी।

उस समय बुजर्गों ने इसे पति के साथ सती हुई पत्नी का कोप माना और उस मुहल्ले में सती का मंदिर बनवा कर क्षमा याचना की । कहा जाता है कि अस्वाभाविक मृत्यु का सिलसिला तो थम गया लेकिन वह सुहाग और संतान सलामती के करवाचौथ और अहोई अष्टमी के त्योहार पर बंदिश लगा गई।

तभी से इस मुहल्ले के ठाकुरों के परिवार में कोई महिला न तो पति के दीर्घायु को करवाचौथ का व्रत रखती है और न ही संतान की सलामती के लिए अहोई अष्टमी का त्योहार मनाती है। सैकड़ों वर्ष से चली आ रही इस परंपरा का पीढ़ी दर पीढ़ी निर्वहन होता चला आ रहा है। इस परंपरा को तोड़ने में महिलाओं को सती मैया के नाराज होने का डर रहता है।

देवी की तरह होती है सती की पूजा

सुरीर में सती की पूजा देवी मैया की तरह हो रही है। कस्बे में सभी जाति के लोग शादी-विवाह में घुड़चढ़ी के दौरान सती मंदिर पर मत्था टेकने आते हैं। मुहल्ले के ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि सती मैया में शक्ति है, इसका अहसास कई बार मुहल्ले को लोगों को हुआ है। जब कभी किसी ने बंदिश की परंपरा को तोड़ने का प्रयास किया है तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है।

रामनगला को सुरीर के पानी से भी परहेज

इस घटना को लेकर नौहझील के गांव रामनगला के ब्राह्मण समाज के लोग आज भी सुरीर में खाना तो दूर पानी तक नहीं पीते हैै। वह इस घटना में सुरीर के इन लोगों को दोषी मानते हैं। गांव के प्रेमचंद शर्मा का कहना है कि घटना को लेकर सुरीर के खाने-पीने से परहेज की परंपरा का निर्वहन पीढ़ी दर पीढ़ी करते आ रहे है।