उमेश भारद्वाज, मथुरा: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों के मल से श्रीकृष्ण जन्मस्थान के आसपास की कॉलोनियां सड़ उठेंगी तो अन्य स्थानों पर भी बदबू और गंदगी के कारण लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ेंगी। कारण नगर निगम द्वारा बनाए गए शौचालयों में ताले लटके हुए हैं। जहां ताले खुले पड़े हैं या स्थानीय लोगों ने तोड़ डाले हैं, वहां गंदगी की भरमार है, सफाई और पानी के अभाव में यह शौचालय सड़ांध मार रहे हैं।

मथुरा-वृंदावन नगर निगम के अफसर धनराशि को ठिकाने लगाने के लिए योजना तो बनाते हैं, पर उसका लाभ शहर की जनता सहित बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों को नहीं मिल पा रहा है। इसका ताजा उदाहरण हैं निगम द्वारा बनाए गए फाइवर के अस्थाई शौचालय। यह शौचालय जब से बने हैं ताले लटक रहे हैं। इसके कारण तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को खाली पड़े प्लाट, नाले-नालियों पर मल और मूत्र विर्सजन के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। गायब हो गए कर्मचारी:-पिछले वर्ष मथुरा को ओडीएफ घोषित किया गया था। मथुरा को कागजों में ओडीएफ घोषित कराने के लिए नगर निगम ने करीब आधा दर्जन स्थानों पर अस्थाई शौचालयों का निर्माण कराया था। सर्वे करने आने वाली टीम को दिखाने के लिए इन शौचालयों में आउट सोर्सिंग से महिला और पुरुष कर्मचारी रखने के साथ ही टैंकरों से पानी भरवाया गया था। सर्वे कर टीम के जाने के बाद से इन शौचालयों पर से कर्मचारी हटा लिए गए, नतीजा इनमें ताले लटके हुए हैं। कहां बने शौचालय:-

-महाविद्या कॉलोनी का चौराहा।

-थाना गोविद नगर के समीप।

-नया बस स्टैंड के सामने।

-बंगाली घाट।

-कलक्ट्रेट।

-कंपू घाट। -टूरिस्ट बस से इटावा से रिश्तेदारों के साथ ब्रज दर्शन के लिए आए हैं। जहां बस खड़ी है, उसके बराबर में शौचालय तो बने हैं पर इनमें ताले लटक रहे हैं। महिलाओं को बाथरूम जाने में दिक्कत हुई तो समीप ही खाली प्लाट में हो आए।

गीता, निवासी इटावा -परिजनों के साथ मथुरा-वृंदावन घूमने आए हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत शौचालय को लेकर है, जब प्रशासन को पता है जन्मस्थान पर सावन में श्रद्धालु आते हैं तो उन्हें यहां शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए।

नीतू, निवासी इटावा

Posted By: Jagran

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