शरद पूर्णिमा पर चमक उठेगा चंद्र सरोवर, धवल चांदनी में 5100 दीपों से झिलमिल होगा 'महारास स्थल'
शरद पूर्णिमा पर गोवर्धन का परासौली स्थित चंद्र सरोवर 5100 दीपों से जगमगाएगा और भगवान रास बिहारी को 1100 लीटर ...और पढ़ें

गोवर्धन स्थित चंद्र सरोवर।
संवाद सूत्र, गोवर्धन (मथुरा)। आसमान से बरसती धवल चांदनी, चंद्र सरोवर के शांत जल में झिलमिलाते हजारों दीप और वातावरण में गूंजती मुरली की मधुर तान। ऐसा अलौकिक दृश्य, मानो द्वापरयुग की महारास लीला एक बार फिर साकार हो उठी हो। शरद पूर्णिमा पर 25 अक्टूबर को गोवर्धन के परासौली स्थित महारास स्थली चंद्र सरोवर आध्यात्मिक आभा और अनुपम सौंदर्य से जगमगाएगा।
सरोवर के घाटों पर 5100 दीप प्रज्वलित किए जाएंगे, वहीं भगवान रास बिहारी को 1100 लीटर दूध से तैयार खीर का भोग समर्पित किया जाएगा। धवल चांदनी के बीच दीपों की कतारें और महारास की स्मृतियां श्रद्धालुओं को ब्रज की दिव्य प्रेम परंपरा से साक्षात्कार कराएंगी।
महारास केवल नृत्य की एक लीला नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, समर्पण और भक्ति का सर्वोच्च प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी मुरली की मधुर तान से गोपियों को आकर्षित कर महारास रचाया था। प्रत्येक गोपी की अभिलाषा थी कि वह अपने आराध्य के साथ नृत्य करे।
भक्तवत्सल भगवान ने अपनी दिव्य योगमाया से प्रत्येक गोपी को अपने सान्निध्य का अनुभव कराया। श्रीकृष्ण के अधरों से निकली मुरली की धुन, गोपियों का प्रेममय नृत्य और चंद्रमा की शीतल चांदनी ने इस लीला को अलौकिक स्वरूप प्रदान किया। यही कारण है कि महारास को ब्रज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में विशिष्ट स्थान प्राप्त है।
शरद पूर्णिमा पर परासौली की महारास स्थली इसी दिव्य प्रसंग की स्मृतियों को जीवंत करती है। महारास स्थली के उपासक भागवत किंकर गोपाल प्रसाद उपाध्याय के अनुसार, धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यता के मुताबिक, भगवान की महारास लीला इतनी दिव्य थी कि चंद्रदेव छह महीने तक एकटक इसे निहारते रहे। लीला के दर्शन में समय का भान तक नहीं रहा।
मान्यता है कि चंद्रदेव के द्रवित रस से ही परासौली में चंद्र सरोवर का निर्माण हुआ। उन्होंने बताया कि वराह पुराण में परासौली का उल्लेख परस्पर वन के रूप में मिलता है, जबकि गर्ग संहिता में चंद्र सरोवर का विशेष महात्म्य वर्णित है।
महाप्रभु वल्लभाचार्य के मतानुसार, परासौली ब्रज की उन पवित्र भूमियों में शामिल है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ छह महीने की रात्रि में महारास किया था। इसी धार्मिक महत्ता के कारण शरद पूर्णिमा पर यहां श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण रहता है।
5100 दीपों से सजेगा चंद्र सरोवर
आन्यौर निवासी ओमप्रकाश कौशिक ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर चंद्र सरोवर के घाटों और महारास स्थली पर 5100 दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। धवल चांदनी के बीच दीपों की रोशनी सरोवर के जल में प्रतिबिंबित होकर अनुपम छटा बिखेरेगी।
भगवान रास बिहारी को सफेद वस्त्र धारण कराए जाएंगे और 1100 लीटर दूध से तैयार खीर का भोग लगाया जाएगा। आयोजन के माध्यम से महारास की दिव्य स्मृतियों को श्रद्धा और भव्यता के साथ संजोया जाएगा।
गिरिराजजी को भी चखाएंगे शरद की खीर
शरद पूर्णिमा पर गोवर्धन के प्रमुख मंदिरों में भी विशेष शरद उत्सव मनाया जाएगा। मुकुट मुखारविंद मंदिर के रिसीवर अमित गोस्वामी ने बताया कि भगवान को सफेद वस्त्र धारण कराकर मुरली के साथ दर्शन कराए जाएंगे और खीर का भोग समर्पित किया जाएगा।
दानघाटी मंदिर के सेवायत दिनेश बाबा और जतीपुरा मुखारविंद मंदिर के महेश शर्मा ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर प्रभु का धवल वस्त्रों से विशेष श्रृंगार कर खीर का प्रसाद अर्पित किया जाएगा। इस तरह शरद पूर्णिमा पर चंद्र सरोवर की महारास स्थली से लेकर गिरिराजजी के मंदिरों तक भक्ति, श्रृंगार और शरद ऋतु की परंपराओं की अनुपम छटा दिखाई देगी।
