जासं, वृंदावन (मथुरा): गोवंश के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने और समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ब्रज के 108 गांवों में छह विषयों पर आधारित परियोजना की शुरुआत होगी। जिसके लिए हासानंद गोशाला की भूमि पर महामना गो ग्राम की स्थापना की जाएगी। परियोजना की आधारशिला 11 फरवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रखेंगे।

मथुरा मार्ग स्थित हासानंद गोशाला पर रविवार को पत्रकार वार्ता में हासानंद गोशाला ट्रस्ट के सचिव सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के निर्वाण दिवस पर 11 फरवरी को सुबह 9 बजे ट्रस्ट की जमीन पर महामना गो ग्राम भूमि पूजन का कार्यक्रम चैतन्य विहार फेस दो में रखा गया है। भूमि पूजन में मुख्यमंत्री के अलावा प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, ब्रज के संत और देश की नामचीन हस्तियां शामिल होंगी। उन्होंने बताया कि परियोजना के धरातल पर क्रियान्वयन को न्यास द्वारा गायों की नस्ल सुधार एवं स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना प्रारंभ कर दिया गया है। जिसके पहले चरण में गोशाला परिसर के नजदीक 108 गावों का चयन किया गया है। इनमें स्वास्थ्य सेवा शिविर व सचल चिकित्सा वाहनों का संचालन, 21 गावों के आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम, करीब 50 गांवों के किसानों को भारत सरकार के जैविक खेती केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा प्रशिक्षण व बीज वितरण किया गया है। अगले साल गोशाला का लक्ष्य एक लाख पौधरोपण करने का है। ताकि ब्रज में पर्यटन, आस्था का यह परिवर्तन श्रद्धालुओं को दिखाई दे।

उन्होंने कहा कि परियोजना में जिन 108 गांवों को समग्र विकास के लिए चुना गया है, उनमें नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन एवं वितरण, किसानों को अच्छे नस्ल की गायों का वितरण, किसानों को प्रशिक्षण, युवा कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र जैसे कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

28 एकड़कें बसेगा महामना गांव

ट्रस्ट की चैतन्य विहार फेस दो में रिक्त पड़ी 28 एकड़ भूमि पर महामना गो ग्राम की स्थापना होगी। यहीं से ब्रज के 108 गांवों में शुरू होने वाली परियोजनाओं का संचालन होगा।

ग्रामीण विकास में ये होंगी सेवाएं

108 गांवों का कायाकल्प करने के लिए इनमें स्वास्थ सेवाएं, शिक्षा, पौधरोपण, जैविक खेती का प्रशिक्षण, संस्कृति और गो आधारित कृषि के लिए लोगों को जागरूक कर जोड़ा जाएगा।

तीन साल का रखा लक्ष्य

ट्रस्ट द्वारा संचालित समग्र ग्राम योजना में गांवों में गो आधारित कृषि और आत्मनिर्भर बनाने के लिए तीन साल की अवधि तय की गई है। उम्मीद जताई गई है कि इस अवधि में 30 से 40 फीसदी असर देखने को मिलेगा। इसके बाद दूसरे गांवों को जोड़ा जाएगा।

गावों के बीच होंगे 30 केंद्र

परियोजना को सफल बनाने के लिए आपस में जुड़े गावों के बीच तीस केंद्र स्थापित होंगे। जिनके जरिए 108 गावों में परियोजना संचालित की जाएगी।

तीन सचल चिकित्सा वाहन व पायलट प्रोजेक्ट

गांवों के बीच तीन सचल चिकित्सा वाहन होंगे। इनमें एमबीबीएस चिकित्सक के साथ फार्मेसिस्ट व नर्सिंग स्टाफ साथ रहेगा। जो ग्रामीणों को निश्शुल्क चिकित्सा सुविधा देगा। इसके लिए पांच गावों का पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। जिसमें गुड़गांव मेडिकल कॉलेज की टीम ग्रामीणों का पूरी तरह से स्वास्थ्य परीक्षण कर छह महीने तक उपचार देगी।

वेटेरिनरी एंबुलेंस भी चलाई जाएगी

गोवंश की चिकित्सा के लिए वेटेरिनरी एंबुलेंस भी 108 गांवों में चलाई जाएंगी। इसके लिए दो सौ चिकित्सकों की टीम तैयार की गई है। जिसमें नोएडा, दिल्ली और आगरा के चिकित्सकों को शामिल किया गया है।

खुशहाली फाउंडेशन करेगा पौधरोपण

108 गांवों में पौधरोपण करने की जिम्मेदारी खुशहाली फाउंडेशन ने ली है, जो दो लाख फलदार पौधों का रोपण इन गांवों में करेगी।

ये रहे मौजूद

वार्ता के दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष एसके शर्मा, अनंतवीर दास, रामकिशन पाठक, डॉ. मनोज गुप्ता, निरुपम भार्गव, विनीत शर्मा, मूलचंद गर्ग व कुंजबिहारी मौजूद थे।

Posted By: Jagran