जागरण संवाददाता, मथुरा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वृंदावन भगवान के गो चारण और गो पालन की भूमि है, ऐसे में गो संवर्धन का अभियान यहीं से शुरू होना चाहिए।

रविवार को यहां चैतन्य विहार में महामना गो ग्राम में मुख्यमंत्री का 19 मिनट का उद्बोधन गाय पर हरी केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि हमने यमुना और गाय के साथ एक जैसा बर्ताव किया, उसका दुष्परिणाम सबके सामने है। गायों को बचाने और उनके संवर्धन का काम ब्रज से पूरे देश में फैलना होगा। इसके लिए हर किसान को भारतीय गोवंश की दो दुधारू गाय पालना जरूरी है। इसके लिए सक्षम लोग गांवों को गाय दान करें। गाय ऊर्जा देने का सशक्त माध्यम है। वह दूध, दही, खाद, गैस सब दे सकती है। एलपीजी सिलेंडर पर खर्च होने वाली मुद्रा विदेश जाती है। गोबर गैस प्लांट लगाकर इसे रोका जा सकता है। बुंदेलखंड में ऐसी योजना शुरू की है। उन्होंने कहा कि पशु छुट्टा घूम रहे हैं, वह इसलिए कि पिछले आठ-दस महीने में गो तस्करी को रोका है। पहले बंगाल के बूचड़खानों के लिए गो तस्करी होती थी, अब संवर्धन की जरूरत है। योगी ने कहा कि महामना मालवीय की सोच साकार करने का समय आ गया है।

आरएसएस के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि ब्रजभूमि आध्यात्मिक संदेश देती है। यह गोशाला नए रूप में कार्य करेगी।

गाय की जगह किसान का घर: गिरि

जूनागढ़ अखाड़े के महंत अवधेशानंद गिरि ने कहा कि कई शोधों में साबित हुआ है कि देसी गाय के दूध में एंटीबाइटिकहै। इसमें अवसाद और उत्तेजना की औषधि है। गाय के स्पर्श से भी कई रोग दूर हो जाते हैं। छह महीने तक गाय के दूध समेत उसके उत्पादों का सेवन से सभी रोग दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि उरुग्वे में भारतीय देसी गाय हैं और वहां की प्रति व्यक्ति आय सवा तीन लाख रुपये है। हमें भी गाय को अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि गायों को गोशालाओं में नहीं, किसान के घर में होना चाहिए।

परंपराओं के जागरण का समय: ज्ञानानंद

गीता मनीषी संत ज्ञानानंद ने कहा कि भारतीय नस्ल के देसी गोवंश को संरक्षण मिलना चाहिए। ग्राम संस्कृति को फिर से जीवंत किया जाए, तभी गाय और देश का भला हो सकता है। गाय आस्था का विषय तो है ही, वर्तमान में प्रबल आवश्यकता भी है। यह परंपराओं के जागरण का समय है, लिहाजा हमें देसी अर्थव्यवस्था की ओर लौटना चाहिए।

सरकार खोले दूध बिक्री केंद्र: विजय कौशल

संत विजय कौशल ने कहा कि जब तक किसान से गाय का दूध महंगे दाम पर नहीं लिया जाएगा, गाय नहीं बचेगी। गाय के दूध में अमृत है, लेकिन गाय का दूध भैंस के दूध से सस्ता बिक रहा है। सरकार को चाहिए कि वह राशन डीलरों की तरह गाय के दूध के बिक्री केंद्र गांव-गांव खोले। किसान से महंगा दूध ले और लोगों को सस्ता दूध दे। उन्होंने प्रदेश के संतों और उद्योगपतियों का भी आह्वान किया कि वे गांवों और किसानों को देसी नस्ल की गाय दान करें।

गांव को यूनिट माने सरकार: शरणानंद

का‌िर्ष्ण गुरु शरणानंद ने कहा कि उनके यहां अलग किस्म की गोशाला है, जहां उन्नत किस्म के नंदी भी तैयार हो रहे हैं। गरीब किसान के लिए गाय तभी उपयोगी है, जब वह आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी। ब्रजवासियों को गाय दान करना अविनाशी की सेवा है। गाय गांव और किसान की अर्थव्यवस्था मजबूत कर सकती है, लेकिन सरकार गांव को यूनिट मानकर काम करे।

By Jagran