मथुरा: मंगलवार सुबह महानगर समेत उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई। पूर्वी और दक्षिणी भाग सूखा ही रहा। जलभराव होने से महानगर की कई कॉलोनियों के लोग घरों में ही कैद होकर रह गए। नेशनल हाईवे भी जलभराव की चपेट में आ गया। छाता, बरसाना और गोवर्धन विकास खंड क्षेत्र में खेत लबालब हो गए। इस इलाके में सूख रही धान की फसल को संजीवनी मिल गई।

मानसून की बारिश इस बार कम हो रही है। सोमवार को राया क्षेत्र में 12 एमएम बारिश रिकार्ड गई थी, जबकि दूसरे दिन मंगलवार को 2.5 एमएम ही वर्षा हुई। मथुरा शहर, वृंदावन, छाता, नंदगांव, बरसाना क्षेत्र में करीब 15 एमएम वर्षा हुई और खेत भी लबालब हो गए। फरह और बलदेव विकास खंड क्षेत्र तो सूखा ही रह गया। नौहझील, मांट और राया क्षेत्र में बूंदाबादी ही हुई। देररात तक आसमान में काली घटाएं छाए हुई थीं। बारिश होने से उमस भरी गर्मी से भी राहत मिल गई और सूख रही फसलों को जीवनदान मिल गया।

जलभराव बना मुसीबत:

महानगर में बलदेवपुरी, माधवपुरी, मानसनगर, गुरुनानक नगर, लाजपत नगर, काशीराम कॉलोनी, महेंद्र नगर, रांची बांगर, ओंकारेश्वर, दीपनगर, चैतन्यलोक, गणेशधाम समेत दो दर्जन से अधिक कॉलोनियों में जलभराव हो गया। कंकाली, भूतेश्वर, नये और पुराने बस अड्डे के रेल पुलों के नीचे जलभराव हो गया। इससे यातायात बाधित हो गया। करीब दो घंटे बाद पानी का स्तर कम हुआ, तब कहीं जाकर यातायात सामान्य हो सका। वृंदावन भी बारिश बंद होने के बाद करीब डेढ़ घंटे तक जलभराव की चपेट में बना रहा। श्यामा प्रसाद मुखर्जी प्राइमरी पाठशाला वृंदावन के परिसर में जलभराव हो गया। शिक्षा मित्र बबीता ने बताया कि जैसे तैसे छात्रों को पानी के बीच से निकाला। हाईवे भी डूबा: नेशनल हाईवे पर भी जलभराव हो गया। लाजपत नगर चौराहा, मंडी समिति के समीप, गोवर्धन चौराहा और छटीकरा पर जलभराव हो गया। नयति के सामने मुख्य मार्ग पर दो फीट तक पानी खड़ा हो गया, जबकि अवागढ़ पर शाम तक सर्विस रोड पर पानी भरा रहा। हालांकि हाईवे पर जलभराव से यातायात पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा।

Posted By: Jagran

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