छाता चीनी मिल आंदोलन में उबाल, हरियाणा से भी पहुंचे किसान; अब ग्रामीण करेंगे भंडारे की सेवा
मथुरा की छाता चीनी मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर किसानों का धरना तेज हो गया है। ...और पढ़ें

छाता में चीनी मिल के लिए धरना देते किसानों के समर्थन में हरियाणा से पहुंचे किसान्।
जागरण संवाददाता, मथुरा। छाता चीनी मिल दोबारा शुरू कराने को लेकर धरना दे रहे किसान हटने को तैयार नहीं हैं। कैबिनेट ने तीन स्तर पर शुरू होने वाली चीनी मिल के लिए पहले चरण में एथेनाल प्लांट को मंजूरी दे दी है। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें चीनी मिल चाहिए। जब तक चीनी मिल शुरू नहीं होगी, धरना नहीं हटेगा।
धरने की आंच हरियाणा के पलवल -होडल और हाथरस तक पहुंच गई है। यहां के किसान भी धरने में पहुंच रहे हैं। छाता क्षेत्र के गांव अलवाई के ग्रामीण सोमवार को धरनास्थल पर पहुंचे। घोषणा की कि मंगलवार से धरनास्थल पर आंदोलनकारियों के लिए ग्रामीण भंडारा की सेवा करेंगे।
छाता चीनी मिल 18 वर्षों से बंद है। हर चुनाव में चीनी मिल मुद्दा बनी, लेकिन कभी शुरू नहीं हो पाई। 13 अगस्त को चीनी मिल की मांग फिर तेज हुई और मिल के गेट पर ही धरना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी। गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण इसी क्षेत्र के विधायक भी हैं।
ऐसे में विपक्षी राजनीतिक दलों ने उन पर सीधा निशाना साधा। चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कहा कि चीनी मिल तीन स्तर पर बनेगी। यह प्रदेश का पहला प्लांट होगा जिसमें एथेनाल बनेगा, चीनी का उत्पादन होगा और बायोमास बिजली का भी उत्पादन होगा। 15 सितंबर को कैबिनेट से एथेनाल प्लांट को मंजूरी भी मिल गई।
पुलिस के हटाने के बाद और बढ़ गए लोग
चीनी मिल मंत्री ने अक्टूबर में सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों इसका शिलान्यास कराने की घोषणा भी कर दी। लेकिन अभी धरना खत्म नहीं हुआ। 20 सितंबर की रात पुलिस ने बलपूर्वक धरना दे रहे लोगों को हटाया, लेकिन अगले दिन फिर दोगुणा संख्या में आंदोलनकारी डट गए।
धरने की अगुवाई कर रहे सेना के पूर्व सूबेदार ललित कर्मयोगी का कहना है कि हमें चीनी मिल चाहिए, जब चीनी मिल शुरू होगी, तभी धरना खत्म होगा। धरने में हरियाणा के पलवल, होडल, मितरौली के साथ ही हाथरस के सादाबाद से भी किसान पहुंच हे हैं।
मितरौली के किसान शमशेर सिंह तीन साथियों के साथ यहां पहुंचे। बोले, जब चीनी मिल चलेगी, तो हमें भी फायदा होगा, रोजगार भी मिलेगा और उपज का मूल्य भी।
सोमवार को छाता क्षेत्र के आजनौख, अलवाई और तातरपुर के बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं धरने पर पहुंचे। जय जवान-जय किसान के नारे के बीज अलवाई के ग्रामीणों ने कहा कि वह सामूहिक रूप से मंगलवार से आंदोलनकारियों के भंडारा लगाएंगे।
