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राधा अष्टमी पर बरसाना में भक्ति का सैलाब, हर तरफ गूंज रहे 'राधे राधे' के जयकारे

By Vineet Kumar Mishra Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 18 Sep 2026 11:58 PM (IST)

राधा अष्टमी पर बरसाना 'राधे राधे' के जयकारों से गूंज उठा है, जहाँ लाखों श्रद्धालु लाडलीजी के प्राकट्य की प्रतीक्षा ...और पढ़ें

बरसाना में शुक्रवार रात दूर तक रोशनी बिखेरता राधारानी मंदिर।

बरसाना में शुक्रवार रात दूर तक रोशनी बिखेरता राधारानी मंदिर।

HighLights

  1. लाखों श्रद्धालु राधा अष्टमी पर बरसाना में भक्ति में लीन।

  2. लाडली महल में राधारानी के प्राकट्य की भव्य तैयारी।

रसिक शर्मा, बरसाना (मथुरा)। ये कान्हा की श्रीराधा का बरसाना है। यहां इन दिनों सांसों में राधानाम है और धड़कनों में लाडलीजी के प्राकट्य की प्रतीक्षा। भक्ति के साथ उमंग है, उत्साह है और उस दिव्य क्षण का साक्षी बनने की व्याकुलता है, जब अष्टदल कमल के गर्भ से रासेश्वरी श्रीराधा प्रकट होंगी।

दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की निगाहें लाडली महल पर टिकी हैं और होठों पर अनवरत गूंज रहा है, राधे... राधे...। शनिवार को राधाष्टमी है। शुक्रवार को पूर्व संध्या पर बरसाना की आभा देखते ही बनी। लाडलीजी के महोत्सव में ब्रह्मांचल पर्वत चंद्रमा सा दमक रहा है, तो वृषभानु महल सहित पूरा बरसाना सूर्य सा प्रकाशवान नजर आ रहा है

गलियों में सजावट, कुंडों पर भक्ति की तरंग और मंदिर परिसर में गूंजता समाज गायन इस नगरी को उत्सव की ऐसी चादर में लपेट रहा है, जिसमें हर रंग राधामय दिखाई दे रहा है।

ब्रज की रज को माथे से लगाने के लिए श्रद्धालुओं की कतारें हैं। कोई सखी वेश में सजा है तो किसी के हाथों में लाडलीजी के लिए उपहार हैं। वस्त्र, फल और मिठाइयों के साथ केक, चाकलेट और फ्रूटी तक भेंट में शामिल हैं। करनाल की राजेंद्र कौर भी यहां आई हैं। लगातार तीन वर्ष से राधाष्टमी पर आ रही हैं

वह कहती हैं कि भक्ति की इस परंपरा में समय के साथ उपहारों का रूप बदला है, लेकिन भाव वही है। हम वही लाते हैं, जिसे देखकर हमारे बच्चे प्रसन्न होते हैं। देहरादून की श्वेता भी लाडली के जन्म पर अपने हाथों से तैयार श्रीखंड लेकर पहुंचीं। शुक्रवार को बरसाना की सुबह सूर्योदय के साथ नहीं, बल्कि सुर और संगीत की लहरियों के साथ हुई।

ब्रजरज, लता-पता और बरसाना के कुंडों की जलतरंगों तक में राधे-राधे की गूंज सुनाई देती रही। शाम ढली तो नंदगांव के गोस्वामी की समाज टोली ने समाज गायन की रसधारा बहाई। बधाई गीतों के बीच चाव चढ़ाने की रस्म हुई। ढोल-नगाड़ों और बैंडबाजों की धुन पर श्रद्धालु जन्म से पहले ही बधाई लेकर लाडली महल की ओर बढ़ते रहे।

शनिवार सुबह चार बजे प्राकट्य की बेला होगी। इस क्षण को अपनी आंखों में बसाने के लिए दूर दराज से श्रद्धालु बरसाना पहुंच चुके हैं। जन्माभिषेक की मंगल ध्वनियों के बीच लाडली महल का शीशमहल अलौकिक छटा बिखेरेगा।

पीली पोशाक में सजेंगी वृषभानु नंदनी

राधाष्टमी की सुबह लड़ली महल का शीशमहल श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बनेगा। जन्माभिषेक की मंगल ध्वनियों के बीच राधारानी का शृंगार और दर्शन भक्तों को भावविभोर करेंगे। शीशमहल की चमक रत्न जवाहरात से अधिक राधा कृष्ण की अलौकिक आभा से दमकती प्रतीत होगी।

पीली पोशाक और आभूषणों से सुसज्जित लाडलीजी की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं की निगाहें मंदिर पर टिकी रहेंगी। शाम को मंदिर के नीचे श्वेत संगमरमर से निर्मित छतरी के नीचे राधारानी का भव्य डोला विराजमान होगा। गोस्वामी समाज की कन्या आरता करेंगी।