आईबीपीएस क्लर्क प्रीलिम्स: 60 मिनट की जंग में जीत की रणनीति, मैथ्स-रीजनिंग और इंग्लिश ऐसे करें सॉल्व
आईबीपीएस क्लर्क प्रीलिम्स परीक्षा 10 और 11 अक्टूबर को है, जिसमें 60 मिनट में 100 सवाल हल करने होंगे। विशेषज्ञों ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
10 और 11 अक्टूबर को है आईबीपीएस क्लर्क प्रीलिम्स परीक्षा
नया पढ़ने के बजाय कमजोरियों पर ध्यान दें, मॉक टेस्ट करें
मैथ्स, रीजनिंग, इंग्लिश के लिए अनुशासित समय प्रबंधन अपनाएं
जागरण संवाददाता, मथुरा। कैलेंडर पर तारीखें तेजी से आगे बढ़ रही हैं। बैंकिंग करियर का सपना देख रहे लाखों युवाओं की धड़कनें भी तेज हो चुकी हैं। मंजिल सामने खड़ी है और रास्ते में बचे हैं महज 15 दिन। 10 और 11 अक्टूबर को आयोजित होने वाली आइबीपीएस क्लर्क प्रीलिम्स परीक्षा को लेकर मुकाबला इस बार बेहद कड़ा है, जहां 11403 पदों के लिए उम्मीदवारों के बीच सीधी होड़ मची है। परीक्षा हाल की घड़ी केवल 60 मिनट की मोहलत देगी और सामने होंगे पूरे 100 सवाल।
बैंकिंग एक्सपर्ट्स की मानें तो यह वक्त ज्ञान के नए पहाड़ खड़े करने का बिल्कुल नहीं है। अक्सर अभ्यर्थी आखिरी समय में नई किताबें खोलकर या मुश्किल टापिक्स के जाल में उलझकर अपनी पुरानी मेहनत पर पानी फेर लेते हैं।
असली बाजीगर वही बनता है, जो नया पढ़ने के बजाय अपनी कमजोर कड़ियों की मरम्मत करने और पहले से तैयार हथियारों को धार देने पर फोकस करता है।
परीक्षा की तैयारी के साथ समय प्रबंधन होगा बड़ी चुनौती
इस निर्णायक मोड़ पर माक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र ही सबसे भरोसेमंद मार्गदर्शक साबित होते हैं। माक टेस्ट में अभ्यर्थी को अपनी गलतियों का एक्सरे करना चाहिए। देखना चाहिए कि कौन सा सवाल बेवजह समय खा गया, कहां जल्दबाजी में सिली मिस्टेक हुई और किस सवाल को छूना ही नहीं चाहिए था। इसके लिए अपनी एक छोटी मिस्टेक नोटबुक बनाकर उसमें अपनी बार-बार होने वाली गलतियों को दर्ज करते रहना चाहिए, ताकि एग्जाम हाल में वही चूक दोबारा न दोहराई जाए।
10 व 11 अक्टूबर को है आइबीपीएस क्लर्क प्रीलिम्स परीक्षा
प्रतियोगी परीक्षा का सबसे बड़ा नियम यही है कि ज्यादा सवाल हल करने से ज्यादा जरूरी है सही सवाल को चुनना और उलझाने वाले सवालों को फौरन छोड़कर आगे बढ़ जाना। समय का गणित ही इस परीक्षा का भाग्य तय करता है। परीक्षा कक्ष में जाने से पहले ही अपनी रणनीति तय रखना जरूरी है। 60 मिनट की इस जंग में मैथ्स और रीजनिंग को 20-20 मिनट और इंग्लिश को 15 मिनट का अनुशासित समय देकर बाकी बचे चंद मिनटों को अपनी गलतियां जांचने के लिए बचाकर रखना ही समझदारी है।
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तीनों विषयों की अपनी अलग रणनीति
तीनों विषयों की अपनी अलग रणनीति है। रीजनिंग में अगर सिटिंग अरेंजमेंट, पजल, इनइक्वैलिटी और कोडिंग-डिकोडिंग जैसे मजबूत स्तंभों पर पकड़ है, तो परीक्षा में नए या उलझाऊ पैटर्न से दूरी बनाकर सुरक्षित स्कोर किया जा सकता है। वहीं मैथ्स में नंबर सीरीज, सिंपलीफिकेशन और डेटा इंटरप्रिटेशन के साथ-साथ बेसिक फार्मूलों का सटीक रिवीजन रफ्तार को पंख लगा देता है। इंग्लिश के लिए ग्रामर के बुनियादी नियम, रीडिंग काम्प्रिहेंशन व वोकैबुलरी के पुराने पन्नों को पलटना ही सबसे सुरक्षित ढाल है।
