मथुरा, जासं। बाजत ताल, मृंदग, ढोल ढप और नगाड़े जोरी रे रसिया। आज ब्रज में होरी रे रसिया। कौन गांव कौ कुंवर कन्हैया प्यारे, कौन गांव की गोरी रे रसिया। होरी खेलन आयौ श्याम आज याये रंग में बोरो री, रंग में बोरो री, हरे बांस की बांसुरियां अरे याये आज तोड़ मरोड़ों री..। गोपियों को फाग में बांसुरी की समुधुर धुन नहीं भा रही है। वे तो बालगोपाल संग ग्वालबालों को प्रेम के रंग में डुबाने को आतुर हैं।

कुछ इसी तरह के भक्ति भाव के बीच ब्रज की होरी में कान्हा के भगत ठाकुर द्वारिकाधीशजी के मंदिर में झूम रहे हैं। नाच रहे हैं और रसिया के सुर में सुर मिलाकर आराध्य को लाड़ लड़ा रहे हैं। वल्लभ कुल (पुष्टिमार्गीय) के श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। सुबह 10 से 11 बजे तक मंदिर के आंगन में ब्रज फाग द्वारकेश रसिया मंडल 40 वर्ष से रसिया गायन कर रहा है। मंडली के कलाकार चुन्नी लाल, छोटे लाल, अजय कुमार, प्रमोद चतुर्वेदी, राजू, हरीदास, ओमप्रकाश उर्फ ओमी भी सुर में सुर मिला कर रसिया की तान को मदमस्त कर रहे हैं। ठाकुरजी के बाल स्वरूप की पूजा अर्चना हो रही है। श्रीकृष्ण राधा के निश्छल प्रेम की होरी के रंग देख-देख कर श्रीकृष्ण की पटरानी यमुना हिलोरें भर रही हैं।

शहर के बीचों-बीच राजाधिराज मार्केट स्थित ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर का सांस्कृतिक वैभव कला और सौंदर्य अनुपम है। मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि होलिकाष्टक के बाद मंदिर में रंग भरी पिचकारियां छूटने लगेंगी। सोने, चांदी और पीतल की पिचकारियों से निकलने वाले रंग की बौछार में भीग कर श्रद्धालु निहाल होंगे। 19 मार्च को रंगभरनी एकादशी को ठाकुरजी को कुंज में विराजमान होकर होली खेलेंगे। त्रयोदशी ठाकुरजी बगीचा में विराजमान होकर होली खेलेंगे, जबकि धुलेंडी के दिन डोला निकलने के साथ ही महोत्सव को समापन हो जाएगा।

Posted By: Jagran

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