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स्वाद ऐसा जो दीवाना बना दे: खास है यूपी का सोनहलवा, देसी घी की शुद्धता है राया की पहचान

Published: Sat, 24 Oct 2026 02:42 PM (IST)

मथुरा के राया कस्बे में विजय मिष्ठान भंडार का मशहूर सोनहलवा अपनी शुद्धता और पारंपरिक स्वाद के लिए जाना जाता ...और पढ़ें

सोनहलवा।

सोनहलवा।

HighLights

  1. सोनहलवा राया के विजय मिष्ठान भंडार की पहचान है।

  2. 1970 में राधेलाल हलवाई ने इसकी शुरुआत की थी।

  3. शुद्ध देसी घी और पारंपरिक विधि से तैयार होता है।

जागरण संवाददाता, मथुरा। राया कस्बे की एक पुरानी, देशी घी की सुगंध से महकती हुई विजय मिष्ठान भंडार की दुकान। यहां आनंद शर्मा अपने पुश्तैनी काम में जुटे हुए हैं। इस काम में वह चौथी पीढ़ी हैं जो सुनहरे तारों से स्वाद का जाल बुन रहे हैं। आप यहां होकर निकले तो आप का इसमें फंसना तय है। स्वाद की सुगंध आपको आगे बढ़ने ही नहीं देगी। यह सुगंध है राया के मशहूर सोनहलवा।

आनंद ने बताया कि इस हलवे की शुरुआत लगभग 1970 में उनके दादा, राधेलाल हलवाई ने अपने हुनर और अभ्यास से यहीं राया में की थी। यह स्वाद सिर्फ राया की पहचान है।

असली सोनहलवा कहीं नहीं मिलता 

हाथरस, मथुरा या सादाबाद में सोन पापड़ी तो मिल सकती है, पर यह असली सोनहलवा कहीं और नहीं मिलता। बातचीत के दौरान आनंद ने इसे बनाने की अनोखी कला साझा की।

ऐसे बनाते हैं सोनहलवा

शुद्ध देसी घी में बराबर मात्रा में बेसन और मैदा भूनकर ठंडा किया जाता है। फिर चीनी की गाढ़ी चाशनी बनाकर उसे पत्थर पर फैलाया जाता है। इसके बाद दो कारीगर मिलकर चाशनी और भुने हुए मिश्रण की लगातार खिंचाई करते हैं। इसे पीटा नहीं जाता, बल्कि इतनी नफासत से खींचा जाता है कि हलवे का एक-एक रेशा अलग और बारीक खिल उठता है।

शुद्धता ही असली पहचान

किसी भी तरह के कृत्रिम रंग का इस्तेमाल नहीं करते। शुद्धता ही इसकी असली पहचान है। अंत में इसके 450 से 500 ग्राम के टुकड़े तैयार किए जाते हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा यह स्वाद आज भी राया की शान बना हुआ है।

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