मथुरा, योगेश जादौन। सिमटते और सूखते जलस्त्रोतों के बीच एक अच्छी खबर है। छूने लायक भी न बचे गोवर्धन के राधा-श्याम कुंड का जल अब आचमन लायक हो गया है। यह हुआ है कुछ महीने के प्रयासों से। उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने गोवर्धन के कुंडों को बेहतर करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। एक निजी संस्था ने इन दो कुंडों के पानी को उपचार के बाद शुद्ध किया है। अब जनता की बारी है कि वह इसे मैला न करे।

ब्रज के कुंडों के जल को साफ करने का पायलट प्रोजेक्ट राधा-श्याम कुंड में चल रहा है। तीन महीने से चल रहे उपचार के सकारात्मक परिणाम आए हैं। दोनों कुंडों के पानी में आक्सीजन अर्थात बीओडी की मात्रा मानक 5.0 से अधिक 5.6 मिली ग्राम प्रति लीटर हो गई है। पहले यह आंकड़ा 0.5 मिली ग्राम प्रति लीटर था। यही नहीं कुल ठोस अपशिष्ट की मात्रा में 90 फीसद की कमी आई है। पानी में सीवेज आदि की गंदगी बेहद कम हुई है। अभी पानी के खारेपन अर्थात टीडीएस में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। हालांकि कुंडों का पानी रंगहीन हो गया है।

गुड़गांव की जेएस वाटर इनर्जी लाइफ कंपनी इन कुंडों की सफाई का काम कर रही है। जल में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा बढ़ने से जलीय जीव आसानी से जिदा रह सकते हैं। पानी में घुलनशील कुल ठोस की मात्रा अभी 3-4 हजार पीपीएम पर बनी हुई है। राधा और श्याम कुंड दोनों जुड़े हैं। इससे दोनों के पानी के आंकड़ों में लगभग समानता है। जल साफ करने की प्रक्रिया 24 जनवरी से शुरू हुई है। दोनों कुंडों का जल आचमन योग्य हो गया है। उपचार से पहले इन कुंडों का पानी काला था। अब यह पारदर्शी हो चुका है। यही नहीं पानी में मौजूद आक्सीजन, मिनरल आदि के मानकों में सुधार हुआ है। यह प्रोजेक्ट अभी एक वर्ष तक जारी रहेगा।

सुनील नंदा, जेएस वाटर इनर्जी

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