छाता शुगर मिल पर कौन है सही? मंत्री कह रहे सितंबर में शिलान्यास की तैयारी, चीनी निगम को पता ही नहीं
मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने छाता शुगर मिल के सितंबर में शिलान्यास का दावा किया है, जबकि राज्य चीनी निगम के ...और पढ़ें
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छाता में बंद पड़ी शुगर मिल।
जागरण संवाददाता, मथुरा। छाता शुगर मिल के सितंबर में शिलान्यास का दावा भले ही किया जा रहा हो, लेकिन राज्य चीनी निगम के अफसरों के पास भी इसकी अब तक अधिकृत कोई जानकारी नहीं है। अधिकारी भी इससे पूरी तरह अनजान बने हुए हैं। वहीं शुगर मिल के प्रस्ताव को भी अब तक कैबिनेट से मंजूरी नहीं मिल सकी है।
हालांकि मंत्री का दावा है हर हाल में सितंबर में शुगर मिल का शिलान्यास कराया जाएगा। चिंता की बात है जिस शुगर मिल को मंजूरी 12 माह में कैबिनेट से मंजूरी नहीं मिल सकी, वह डेढ़ माह में धरातल पर नजर आएगी। पीपीपी माडल पर प्रस्तावित शुगर मिल की क्षमता 10 हजार कुंतल गन्ना प्रतिदिन पेराई की होगी। एथेनाल प्लांट भी लगाया जाएगा।
छाता शुगर मिल का शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक बाबू तेजपाल सिंह ने वर्ष 1978 में किया था। उस समय मिल की क्षमता 1250 टीसीडी (टन प्रतिदिन) पेराई की थी। घाटा एवं भ्रष्टाचार की दीमक ने 30 वर्ष में ही चीनी मिल की मिठास छीन ली। वर्ष 2008 में बसपा सरकार ने पेराई सत्र बंद करने की घोषणा की, जो फिर चालू न हो सकी।
वर्ष 2023 में योगी सरकार ने अंतरिम बजट में शुगर मिल के 550 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 85 करोड़ रुपये का प्रविधान किया। वर्ष 2024 के बजट में सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रविधान किया। इसके बाद राज्य चीनी निगम ने निविदा प्रक्रिया जारी की। लेकिन, पांच बार इसकी निविदा जारी की, लेकिन दरें कम होने के कारण किसी कंपनी ने सहभागिता नहीं की।
अक्टूबर, 2024 में सरकार ने नए सिरे से चीनी मिल की डीपीआर बनाने के आदेश दिए। राज्य चीनी निगम ने वर्ष 2025 में 250 करोड़ रुपये की डीपीआर चीनी मिल की स्थापना कार्य की तैयार की। इसके अलावा वेयरहाउस एवं डिस्टलरी प्लांट की अलग डीपीआर बनाई गई हैं। डीपीआर को अब तक कैबिनेट से मंजूरी नहीं मिल सकी है।
बीते दिनों गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने शुगर मिल का शिलान्यास सितंबर में मुख्यमंत्री से कराए जाने का दावा किया है। शुगर मिल के शिलान्यास की राज्य चीनी निगम के ईडी तक को जानकारी नहीं है।
ये फंसे रहे अब तक पेच
छाता शुगर मिल की स्थापना में एक नहीं कई पेच फंसे थे। सबसे पहले वर्ष 2021-22 में तैयार डीपीआर को मंजूरी वर्ष 2023 में मिली। देरी के कारण सामान की लागत बढ़ गई। इसके कारण निविदा नहीं हो सकी। दूसरा पेच संशोधित डीपीआर को कैबिनेट से मंजूरी न मिलने का फंसा रहा। तीसरा पेच खारे पानी का भी रहा।
वर्ष 2025 में शासन के निर्देश पर राज्य चीनी निगम लखनऊ की एक टीम ने छाता शुगर मिल का निरीक्षण किया। उस समय खारे पानी की भी बात सामने आई थी। चूंकि चीनी मिल के लिए मीठे पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन यहां का पानी खारा बताया गया था। इसके कारण भी शुगर मिल की स्थापना का कार्य लटका रहा।
हर हाल में सितंबर में होगा मिल का शिलान्यास: चौधरी लक्ष्मीनारायण
गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौ. लक्ष्मीनारायण ने कहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समय लेकर हर हाल में सितंबर में शुगर मिल का शिलान्यास हम कराएंगे। पुरानी डीपीआर करीब 500 करोड़ की थी, लेकिन इस बार अलग-अलग बनाई गई हैं। 250 करोड़ रुपये से शुगर मिल बनेगी।
वेयरहाउस की अलग डीपीआर है, ये भी बनाया जाएगा। डिस्टलरी का प्लांट भी लगाया जाना प्रस्तावित है, इसकी डीपीआर तैयार है। ये काम बाद में कराया जाएगा। पहले चीनी मिल की स्थापना की तैयारी है।
ये है दावा
- 250 करोड़ रुपये से पीपीपी माडल पर छाता शुगर मिल बनाने की तैयारी।
- 12 माह लगेगा मिल बनने में, बनी तो वर्ष 2027 में पहला पेराई सत्र संभव।
- 10,000 कुंतल प्रतिदिन की क्षमता, आगे क्षमता वृद्धि की व्यवस्था का दावा।
- 12 माह सालभर बनेगा एथेनाल, गन्ना न मिलने पर मक्का व बाजरा से बनेगा।
- 500 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार, आसपास के लोगों की बढ़ेगी आय।
