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84 कोसी ब्रज यात्रा शुरू, पहली बार बाबा के बिना रवाना हुए हजारों श्रद्धालु; 34 साल तक की थी अगवानी

Published: Sat, 24 Oct 2026 07:39 PM (IST)Updated: Sat, 24 Oct 2026 07:42 PM (IST)

बरसाना में संत रमेश बाबा के बिना पहली बार राधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा शुरू हुई, जिसमें लगभग दस हजार श्रद्धालु शामिल हुए।

34 साल से बाबा के मार्गदर्शन में चल रही थी ब्रज यात्रा

 34 साल से बाबा के मार्गदर्शन में चल रही थी ब्रज यात्रा 

HighLights

  1. संत रमेश बाबा के बिना पहली बार ब्रज चौरासी कोस यात्रा शुरू।

  2. बरसाना में पहले दिन दस हजार श्रद्धालुओं ने यात्रा में भाग लिया।

  3. 34 वर्षों की परंपरा में संत बाबा की कमी महसूस की गई।

संवाद सूत्र, बरसाना(मथुरा)। गहवर वन में हरिनाम संकीर्तन की स्वर लहरियां गूंज रही थीं, ठाकुर मानबिहारीलाल का डोला आगे बढ़ रहा था और हजारों श्रद्धालु राधारानी के जयकारे लगा रहे थे। आस्था का वही प्रवाह, वही परंपरा और वही भक्ति का उत्साह, लेकिन इस बार एक कमी हर कदम पर महसूस हो रही थी।

जिन संत रमेश बाबा के सानिध्य और मार्गदर्शन में 34 वर्षों से राधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा आगे बढ़ती रही, इस बार उनके बिना पहली बार यात्रा का शुभारंभ हुआ। शनिवार को यात्रा के पहले दिन संकीर्तन के बीच बाबा की स्मृतियां श्रद्धालुओं के मन को भावुक करती रहीं। लगा, मानो ब्रज की राहों पर हरिनाम के साथ बाबा के प्रति श्रद्धा और विरह भी चल रहा हो।

संत रमेश बाबा के संकल्प से शुरू हुई 36 दिवसीय राधारानी वार्षिक ब्रजयात्रा के पहले दिन करीब दस हजार श्रद्धालुओं ने सुबह छह बजे प्रथम पड़ाव स्थल पर यात्रा का संकल्प लिया। परंपरानुसार ठाकुर मानबिहारीलाल के डोले के साथ श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन करते हुए निकले।

पुरानी गोशाला, सूर्यकुंड, नौबारी-चौबारी, तुंगविद्या सखी मंदिर, रतनकुंड, श्याम शिला और नई गोशाला होते हुए यात्रा पुनः पड़ाव स्थल पहुंची। पहले दिन ब्रजयात्रियों ने तुंगविद्या सखी मंदिर में दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

200 श्रद्धालुओं से शुरू हुई थी यात्रा

1988 में संत रमेश बाबा ने महज दो सौ श्रद्धालुओं के साथ इस ब्रजयात्रा की नींव रखी थी। समय के साथ यह यात्रा आस्था का विराट आयोजन बन गई और देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल होने लगे।

बाबा का विश्वास था कि ब्रज की इस पावन यात्रा में भगवान का स्मरण जीव को सांसारिक माया से ऊपर उठने और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। रविवार को ब्रजयात्री गहवर वन की परिक्रमा करेंगे और बरसाना के प्रमुख लीला स्थलों के साथ श्रीजी मंदिर में राधारानी के दर्शन करेंगे।