ठाकुर बांकेबिहारी का बढ़ने लगा खजाना, 18 गुल्लकों से ही निकले करोड़ों रुपये; असरदार रहा कदम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और प्रबंधन समिति की सख्ती के बाद ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर का खजाना बढ़ा है। हाल ही ...और पढ़ें

वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में जुटे श्रद्धालु।
संवाद सूत्र, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर का खजाना अब पहले की अपेक्षा बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने चढ़ावे को लेकर सख्ती की। भंडारियों पर अंकुश लगाया और श्रद्धालुओं को जागरूक किया तो इसका असर भी साफ दिखा। सख्ती के बाद पहली बार मंदिर की गुल्लक खोली जा रही हैं। 18 गुल्लक खोली गई हैं। इसमें 3.23 करोड़ रुपये का चढ़ावा निकला।
14 गुल्लक की गिनती अभी शेष है। जुलाई में करीब चार करोड़ रुपये चढ़ावा निकला था। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में दान देने के लिए जगह-जगह गुल्लक रखी गई हैं। इसी वर्ष अगस्त में मंदिर की उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि मंदिर में सेवायतों की सहायता के लिए सात से आठ भंडारी रहते हैं। यह श्रद्धालुओं को चढ़ावा गुल्लक में नहीं डालने देते।
कोई गुल्लक के ऊपर डलिया रख देता है, कोई फूल-माला। श्रद्धालुओं का चढ़ावा खुद लेकर जेब में रख लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर चढ़ावे की पाई-पाई कोष में जमा करने के आदेश दिए। इसके बाद समिति ने भंडारियों पर अंकुश लगाया और बाकी को हटाकर केवल दो भंडारी ही मंदिर प्रबंधन की ओर से तैनात किए। भंडारी श्रद्धालु से प्रसाद व फूल-माला लेकर सेवायत तक पहुंचाते हैं।
समिति ने गुल्लक में क्यूआर कोड लगाया। मंदिर में सूचना चस्पा कराई कि किसी को दानराशि देने के बजाए गुल्लक में डालें या फिर आनलाइन दान करें। मई 2026 में जब गुल्लक खोली गईं तो 4.90 करोड़ रुपये चढ़ावा निकला। इसके बाद जुलाई में जब गुल्लक खुलीं तो करीब चार करोड़ रुपये चढ़ावा मिला। अगस्त में सख्ती के बाद पहली बार गुल्लक खोली जा रही हैं।
समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि अब तक 18 गुल्लक खोली गई हैं. इनमें 3.23 करोड़ दानराशि निकली है। उन्होंने बताया कि चढ़ावे में पारदर्शिता के लिए हम ऑनलाइन दान पर जोर दे रहे हैं। इसका भी असर दिखा है। पहले प्रतिदिन दस से 15 हजार रुपये ऑनलाइन दान होता था, अब 30 से 40 हजार तक पहुंच रहा है। अप्रैल से सितंबर तक 1.81 करोड़ रुपये दान आनलाइन माध्यम से मिला है।
