मथुरा में बांकेबिहारी मंदिर के चांदी के रथ की जांच में अधिकारियों को सेवायतों ने लौटाया
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के दौरान चांदी का रथ न विराजित करने के मामले में जांच तेज हो गई है।

वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर सेवायत के यजमानों द्वारा अर्पित चांदी का रथ। - फोटो: जागरण आर्काइव
HighLights
बांकेबिहारी मंदिर में चांदी का रथ न रखने पर जांच शुरू।
जांच करने पहुंचे अधिकारियों को सेवायत ने वापस भेजा।
अधिकारियों ने सेवायत को रथ सुरक्षित रखने का पत्र दिया।
जागरण संवाददाता, मथुरा। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रीजगन्नाथ रथयात्रा में आराध्य के समक्ष चांदी का रथ विराजित न करने की जांच तेज हो गई है। उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के निर्देश पर जांच टीम रविवार दोपहर पुलिस बल के साथ सेवायत के घर पहुंची।
सेवायत ने कहा कि उनके पास जांच के क्या आदेश हैं, अधिकारी मौके पर जांच का आदेश न होने पर लौट गए। फिर सेवायत को पत्र लिखकर रथ को सुरक्षित रखवाने के निर्देश दिए।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में प्रतिवर्ष सेवाधिकारी ब्रजेंद्र गोस्वामी श्रीजगन्नाथ रथयात्रा पर एक यजमान द्वारा अर्पित चांदी के रथ को झांकी में सजाते थे। लेकिन इस वर्ष चांदी का रथ विराजित नहीं किया गया। इस पर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के पूर्व सदस्य और मंदिर सेवायत दिनेश गोस्वामी ने सवाल उठाया।
इस पर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने एक अगस्त को मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की। इसमें एसएसपी श्लोक कुमार और नगर आयुक्त ओजस्वी राज भी शामिल हैं।
रविवार दोपहर ढाई बजे सीओ वृंदावन संदीप सिंह और अपर नगर मजिस्ट्रेट रामप्रसाद त्रिपाठी ने सेवायत ब्रजेंद्र गोस्वामी के घर जाकर चांदी का रथ दिखाने को कहा। ब्रजेंद्र ने इसका विरोध किया, अन्य सेवायत भी आ गए।
कहा कि बिना जांच का आदेश दिखाए रथ नहीं दिखाया जाएगा। इस पर अधिकारी लौट गए। इसके बाद दोनों अधिकारियों ने ब्रजेंद्र को पत्र लिखकर रथ को सुरक्षित रखने और संबंधित कागजात प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के सदस्य हिमांशु गोस्वामी का कहना है कि जांच टीम ने सीओ और अपर नगर मजिस्ट्रेट शामिल ही नहीं हैं। इनको जांच का अधिकार ही नहीं है।
उधर, सीओ ने बताया कि हमने ब्रजेंद्र गोस्वामी से रथ के बारे में पूछताछ की, समिति के आदेश पर हमने पत्र दे दिया है। उन्हें पत्र देकर रथ के बारे में जानकारी की जा रही है।
