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बांकेबिहारी मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से मंदिर सेवायतों के उड़े होश, एक-एक पैसा कोष में होगा जमा

Published: Wed, 26 Aug 2026 11:02 AM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में जगमोहन के चढ़ावे पर सेवायतों का अधिकार छिन जाएगा, ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने जगमोहन के चढ़ावे पर सेवायतों का अधिकार छीना

  2. अब मंदिर कोष में जमा होगा जगमोहन का सारा चढ़ावा

  3. सेवायतों की लाखों की आय पर पड़ेगा सीधा असर

संवाद सहयोगी, वृंदावन (मथुरा)। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ावा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश ने मंदिर सेवायतों के होश उड़ा दिए हैं। अब तक व्यवस्था यह है कि मंदिर के जगमोहन में जो भी दानराशि या अन्य चढ़ावा अर्पित होता था उस पर अधिकारी उस दिन सेवा करने वाले सेवाधिकारी का होता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब जगमोहन पर चढ़ावे का अधिकार भी छिन सकता है। इससे सेवायतों की मुश्किल बढ़ेगी। 

एक सेवा का ही सेवायत को मिलता है लाखों रुपया का चढ़ावा

सुप्रीम कोर्ट में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ावा को लेकर मंगलवार को हुई सुनवाई में न्यायालय ने अंतरिम आदेश में मंदिर के मंदिर में आने वाला श्रद्धालुओं का एक-एक पैसा मंदिर कोष में जमा करने को कहा। इस आदेश के दायरे में सेवायतों का वह अधिकार भी है, जिसके तहत वह जगमोहन पर आने वाली दानराशि लेते हैं।

दरअसल, मंदिर प्रबंधन को केवल दान पेटिका या फिर आनलाइन या चेक से दिया गया दान ही मिलता है। बाकी सुबह और शाम अलग-अलग सेवायत होते हैं, जगमोहन पर श्रद्धालु जो चढ़ावा चढ़ाते हैं, उन पर सेवायत का अधिकार है। एक सेवायत को एक सेवा में लाखों का चढ़ावा मिलता है।

ये रही है अब तक व्यवस्था, इसमें भी मतभेद

उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति में शामिल सेवायत सदस्य रजत गोस्वामी के अनुसार 1939 में तय हुई स्कीम में गोलक व कार्यालय में जमा दान मंदिर कोष में जमा होता है, जबकि गर्भगृह, जगमोहन में अर्पित चढ़ावे का अधिकार सेवायत का होता है। इसी तरह की परंपरा का निर्वहन अब तक होता आया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए जगमोहन में अर्पित चढ़ावा भी मंदिर कोष में जमा करने के अंतरिम आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को उचित बताते हुए कही ये बात 

मंदिर सेवायत अशोक गोस्वामी इससे विपरीत सुप्रीम कोर्ट के आदेश को उचित बताते हुए कहते हैं कि मंदिर की स्कीम में स्पष्ट उल्लेख है कि चढ़ावा चाहे गोलक में हो, जगमोहन अथवा गर्भगृह का हो, सब पर अधिकार मंदिर कोष का है। यदि कोई यजमान स्पष्ट कहे कि वह जो चढ़ावा मंदिर में अर्पित कर रहा है, अपने सेवायत को देना चाहता है, उसी चढ़ावे, पोशाक, आभूषण पर अधिकार मंदिर सेवायत का है।

ठाकुरजी ने सेवायतों को दिखाया करनी का फल

मंदिर सेवायत व उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के पूर्व सदस्य सेवायत दिनेश गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सीधे तौर पर ठाकुर बांकेबिहारीजी की मंशा के अनुसार मानते हुए कहा मंदिर सेवायतों ने आपसी झगड़े, मनमानी से ठाकुरजी की सेवा परंपराओं से जिस प्रकार खिलवाड़ किया, केवल आर्थिक लाभ के लिए परंपराओं का हनन करने से भी नहीं चूके। सेवायतों के कुछ परिवारों की आपसी कलह का ही कारण था कि मंदिर की अपनी कमेटी का गठन नहीं हो सका था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिए हैं सीधे तौर पर ठाकुर बांकेबिहारीजी ने ही न्यायालय को प्रेरणा देकर इस तरह के आदेश पारित करवाए हैं।

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ठाकुरजी के सोने-चांदी के वाहनों पर सेवायत लेंगे निर्णय

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान चांदी के रथ, शेषनाग आदि की परंपरा के बारे में भी अपने निर्णय में मंदिर कोष का अधिकार माना है। न्यायालय के इस आदेश पर सेवायत रजत गोस्वामी ने कहा एक दो दिन में सभी सेवायतों संग बैठक कर इन परंपराओं के बारे में पूरी स्पष्ट चर्चा होगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के समक्ष क्या जवाब देना है, सभी की सहमति पर भी निर्णय लिया जाएगा।

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