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बांकेबिहारी मंदिर में वीआईपी दर्शन पर फिर बढ़ा विवाद, सेवायत और प्रबंधन समिति आमने-सामने

By Raja Tiwari Edited By: Prateek Gupta
Published: Thu, 05 Mar 2026 11:20 PM (IST)

वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सेवायतों और प्रबंधन समिति के बीच विवाद फिर गहरा गया है। गुरुवार सुबह सेवाधिकारियों ...और पढ़ें

बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन को लगी कतार।

बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन को लगी कतार।

संस, जागरण, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में व्यवस्थाओं को लेकर सेवायतों और उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के बीच विवाद थम नहीं रहा है। गुरुवार सुबह आठ बजे के बाद सेवाधिकारी के यजमानों के प्रवेश पर अचानक रोक लगा दी गई।

जिसके बाद गोस्वामी समाज और उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के बीच फिर विवाद की स्थिति बनी। गोस्वामी पक्ष ने इसे परंपराओं में हस्तक्षेप बताया, जबकि समिति का कहना है कि भीड़ प्रबंधन और पूर्व आदेशों के पालन के तहत व्यवस्था लागू की जा रही है।

गोस्वामी पक्ष का आरोप है कि समिति के कुछ सदस्य लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि वर्ष भर दोनों समय जगमोहन से बाहर से दर्शन कराए जाएं, जो परंपरा के विपरीत है। गुरुवार सुबह सेवायत ब्रजेश गोस्वामी उर्फ मोंटू गोस्वामी की सेवा थी। बताया गया कि आठ बजे तक उनके यजमान वीआइपी गेट से आकर दर्शन कर रहे थे।

इसके बाद अचानक एक पुलिसकर्मी ने आकर कहा कि अब किसी भी यजमान को अंदर आने की अनुमति नहीं मिलेगी, ब्रजेश ने बताया कि पुलिसकर्मी से पूछा कि किसने आदेश दिया तो कहा गया कि ऊपर से है।

आरोप है कि उनकी सेवा के दौरान यजमानों के प्रवेश पर इसलिए रोक लगाई गई क्योंकि उन्होंने ठाकुरजी को जगमोहन में विराजित नहीं कराया और गर्भगृह से ही दर्शन कराए। उनका कहना है कि पूर्व सेवायतों शैलेंद्र गोस्वामी व श्रीवर्धन गोस्वामी की सेवा के समय यजमानों को प्रवेश दिया गया, क्योंकि वह समिति सदस्य हैं।

अब अचानक नियम बदल दिए गए। वह भी सिर्फ मौखिक रूप से आदेश जारी किए जा रहे हैं। विलास चंद्र गोस्वामी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल भीड़ प्रबंधन के उद्देश्य से उच्चाधिकार प्रबंधन समिति गठित की है, लेकिन समिति मंदिर की प्राचीन परंपराओं में बदलाव का प्रयास कर रही है।

उनका कहना है कि मंदिर की वास्तु और परंपरा के अनुसार शयन, शृंगार और भोग जैसी सेवाएं गर्भगृह के भीतर ही होती हैं और विशेष अवसरों पर ही ठाकुरजी जगमोहन में विराजते हैं। समिति के सदस्य सेवायत दिनेश गोस्वामी का कहना है कि वीआइपी व्यवस्था पहले से ही प्रतिबंधित थी और उसी आदेश का पालन किया जा रहा है।

ये सेवा कैसे शुरू हुई, किसके कहने पर शुरू हुई और गुरुवार को अचानक क्यों बंद कर दी गई, यह जांच का विषय है। समिति सदस्यों को इसकी छूट मिली, लेकिन समिति अब नहीं देना चाह रही है। यह समिति का निर्णय है, किसी एक सदस्य का निर्णय नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि वीआइपी श्रेणी को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया जाए, जैसे डीएम या मंत्री स्तर तक वीआइपी प्रवेश रहेगा तो भविष्य में विवाद की स्थिति नहीं बनेगी।