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बांकेबिहारी मंदिर, प्रबंधन ने जताई नाराजगी तो दो भंडारी पहुंच गए प्रसाद और फूल अर्पित कराने

By Vipin Parashar Edited By: Prateek Gupta
Published: Thu, 27 Aug 2026 07:27 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में फूल-माला न लेने वाले भंडारी चेतावनी के बाद लौट ...और पढ़ें

बांकेबिहारी मंदिर में गुरुवार को श्रद्धालुओं से अर्पित करने को प्रसाद व फूल लेते भंडारी।

बांकेबिहारी मंदिर में गुरुवार को श्रद्धालुओं से अर्पित करने को प्रसाद व फूल लेते भंडारी।

संवाद सहयोगी, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में एक दिन पहले अचानक श्रद्धालुओं से फूल माला न लेने वाले भंडारी चेतावनी के बाद लौट आए। गुरुवार सुबह दो भंडारी ने व्यवस्था संभाली। दूसरे दिन ठाकुरजी को फूलमाला व प्रसाद अर्पित हो सके। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का असर यह रहा कि मंदिर प्रबंधन केवल दो ही भंडारी की अनुमति देता है, लेकिन चढ़ावे की चाह में आठ से दस भंडारी तैनात रहते थे। 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश जारी कर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ने वाली पाई-पाई मंदिर कोष में जमा करने का करने को कहा। ऐसे में सेवायतों के लिए यह मुश्किल हो गई है। अभी तक मंदिर की दानपेटिका और कार्यालय में जो भी चढ़ावा आता है, वही मंदिर कोष में जाता है, लेकिन जगमोहन (गर्भगृह के बाहर चबूतरा) पर जो भी चढ़ावा अर्पित होता है, वह सेवायत का होता है।

सेवायत और श्रद्धालुओं के बीच एक कड़ी भंडारी है। यह वीआइपी कटहरा और उसके आसपास तैनात रहकर श्रद्धलुओं का प्रसाद, फूल माला सेवायतों के जरिए ठाकुर जी को अर्पित करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार को भंडारी वीआइपी कटहरे में नहीं पहुंचे। ऐसे में श्रद्धालुओं को खुद ही फूलमाला और प्रसाद फेंककर अर्पित करना पड़ा

मंदिर प्रबंधन ने प्रसाद चढ़वाने में मदद के लिए दो भंडारी नियुक्त किए हैं। इन्हें मानदेय भी मंदिर प्रबंधन ही देता है, लेकिन चढ़ावे के लालच में आठ से दस भंडारी हमेशा तैनात रहते हैं। उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने सुप्रीम कोर्ट में इसकी शिकायत भी की और कहा कि भंडारी श्रद्धालुओं से पैसा लेकर अपनी जेब में रख लेते हैं।

बुधवार को जब भंडारी नहीं पहुंचे तो मंदिर प्रबंधन ने कार्रवाई की चेतावनी दी। चेतावनी के बाद गुरुवार सुबह से दो भंडारियों ने व्यवस्था संभालते हुए दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं के माला प्रसाद को सेवाधिकारी के जरिए ठाकुरजी तक पहुंचाया और भोग वापस श्रद्धालुओं काे दिया

मंदिर सेवायत अशोक गोस्वामी ने कहा मंदिर की स्कीम के अनुसार दो भंडारियों की ड्यूटी रहती है कि वह श्रद्धालुओं का प्रसाद-माला ठाकुरजी तक पहुंचाएं और भोग लगने के बाद भक्तों को वापस करें। इसके लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से भंडारियों को मानदेय दिया जाता है। वर्तमान में चढ़ावा की चाहत में आठ से दस भंडारी इस काम में लंबे समय से जुटे थे।

जब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई तो जो दो की तैनाती थी, उन्हें काम नहीं बंद करना चाहिए था। इन भंडारियों का एक दिन का मानदेय भी कटना चाहिए। मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार पहले ही भंडारियों के इस कृत्य पर कार्रवाई की बात कह चुके हैं।