बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ावा विवाद, सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखने की तैयारी में सेवायत
वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद में 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम ...और पढ़ें

बांकेबिहारी मंदिर।
संवाद सहयोगी, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद में आठ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई अहम होगी। इसमें मंदिर सेवायतों ने अपना पक्ष रखने की तैयारी पूरी कर ली है। उनका दावा है कि उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने 25 अगस्त को न्यायालय में चढ़ावे में हेरफेर को लेकर जो तथ्य और फोटो प्रस्तुत किए, वह भ्रामक हैं।
इसी तथ्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चढ़ावे की पाई-पाई मंदिर कोष में जमा करने को कहा था। उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में मंदिर के भंडारियों पर श्रद्धालुओं के चढ़ावे में हेरफेर करने और उसे अपने पास रखने का आरोप लगाया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भंडारी श्रद्धालुओं से केवल माला-प्रसाद लें।
ठाकुरजी को अर्पित किया जाने वाला चढ़ावा मंदिर की गोलक अथवा कार्यालय में जमा कराया जाए। सेवायतों ने अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा था। अब आठ अक्टूबर की सुनवाई में इसका जवाब दिया जाएगा। उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के सदस्य सेवायत हिमांशु गोस्वामी कहते हैं कि समिति ने सुप्रीम कोर्ट में जिस व्यक्ति को भंडारी बताकर मंदिर से रुपये लेकर निकलते फोटो में दिखाया था।
वह न तो मंदिर का कर्मचारी है और न ही किसी सेवायत से जुड़ा है। उनका कहना है कि 1939 में मंदिर के प्रशासक सिविल जज जूनियर डिवीजन के आदेश के मुताबिक गर्भगृह में श्रद्धालु द्वारा अर्पित दान पर सेवाधिकारी का अधिकार है।
उन्होंने बताया कि समिति में चार सेवायत भी सदस्य हैं। सेवायतों ने अब तक गलियारा के लिए हुई भूमि की रजिस्ट्री की पत्रावली और खर्च का विवरण मांगा था, लेकिन उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसे भी हम सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे।
