मथुरा: न अल्ट्रा साउंड मशीन काम करती है और न ही एक्सरे हो पा रहा है। 35 बरस पुरानी एक्सरे मशीन अब जवाब दे गई है। बेड की कई दिन तक बदली नहीं जा रहीं। बंद पड़े कूलरों में पानी आखिरी बार कब पड़ा कोई नहीं जानता। ये बदहाली उस जिला अस्पताल की है, जिस पर मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी है। मरीज उम्मीदें बांधे आते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं। अस्पताल कोमा में है और व्यवस्थाएं वेंटीलेटर पर।

शनिवार सुबह के साढ़े नौ बज रहे थे। पर्चा बनवाने को मरीजों की विडो पर लंबी लाइन थी। पसीने से तरबतर मरीज लाइन तोड़ पर्चा बनवाने की जिद्दोजेहद करने लगे, तो उनकी लाइन में लगे लोगों से बहस भी हुई। दूसरे कमरे में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आरडी गौतम अपने कमरे में खाली बैठे थे। अल्ट्रासाउंड मशीन बंद हो गई। 35 बरस पुरानी मशीन जवाब दे गई। एक्सरे कराने के लिए साठ से 70 मरीज रोज आते हैं। एक्सरे टेक्नीशियन विकरण अधिकारी सतीश गौतम ने बताया कि 35 साल पुरानी मशीन होने के कारण एक्सरे का रिजल्ट क्लियर नहीं आता है। अल्ट्रासाउंड के लिए मरीज चक्कर लगाते हैं । मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए कम से कम दस दिन का समय दिया जाता है। कूलर में पानी नहीं, चादर भी गंदी-

हाल महिला वार्ड का भी कम खराब नहीं था। यहां दस बजे पोछा लगाया जा रहा था। वार्ड में लगा कूलर बंद था और पानी एक बूंद भी नहीं। बेड पर चादरें भी नहीं बदली गईं। एक कोने में एक अज्ञात महिला मरीज पड़ी थी, एक अन्य मरीज के साथ आई महिला ने उसे पानी पिलाया। वार्ड में न तो कोई न नर्स दिखी और न ही वार्ड बॉय। मरीज नहीं तो डॉक्टर भी गायब-

एनसीडी क्लीनिक में डॉक्टर सीट से गायब थे, बताया गया चाय पीने गए हैं। यहां फीजियोथेरेपिस्ट का भी केबिन खाली था। एनसीसीडी क्लीनिक में एक भी मरीज नहीं दिखा। सीनियर सिटीजन के लिए बनाया गया जिरियाटिक वार्ड पूरी तरह से अस्त-व्यस्त। वार्ड में सभी सीनियर सिटीजन की भर्ती से जुड़ा साजो सामान नया है, लेकिन कोई मरीज भर्ती नहीं है। मरीज बैठने की व्यवस्था तक नहीं -

महर्षि दयानंद सरस्वती अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या काफी है, लेकिन उनके यहां बैठने की व्यवस्था नहीं है। पीने के पानी का इंतजाम है, लेकिन ठंडा नहीं। इमरजेंसी के सामने बेतरतीब वाहनों की पार्किंग मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। पूछताछ के लिए बने केबिन में वर्षों से ताला लटका है। सीसीटीवी भी अंधे हो चुके हैं।

बाहर की दवाएं लिख देते हैं डॉक्टर-

ये वह जिला अस्पताल हैं, जहां चिकित्सक सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हैं। मरीजों को बाहर की दवाएं लिख दी जाती हैं। सीएमएस इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने में नाकाम हैं। वहीं परिसर में स्थापित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र सूना पड़ा है। औषधि केंद्र के संचालक श्याम कुमार ने बताया डॉक्टर यहां की दवाएं नहीं लिखते, जबकि बाहर की दवाएं धड़ल्ले से लिखी जा रही हैं। क्या कहते हैं सीएमएस

सीमित संसाधनों में बेहतर सेवा देने की हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही ओपीडी में मरीजों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था की जाएगी। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए इंजीनियर को बुलाया गया है।

-डॉ. आरएस मौर्या, सीएमएस। क्या कहते हैं मरीज

- अपनी बहन का उपचार कराने आई अंगूरी देवी ने बाताया कि वार्ड तीन में भर्ती अज्ञात महिला मरीजों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। प्यास लगने पर मैंने इन मरीजों को पानी पिलाया और खाना भी खिलाया। थोड़ा इनकी ओर ध्यान दिया जाए तो जल्दी ठीक हो सकती हैं। अल्टासाउंड कराने आई धौली प्याऊ की रहने वाली युवती सपना ने बताया कि 21 अगस्त को अल्ट्रासाउंड के लिए आई थी, लेकिन पर्चे पर दस दिन बाद की तारीख दी गई, पर आज बताया गया मशीन खराब है। पता नहीं कब अल्ट्रासाउंड होगा।

Posted By: Jagran

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