मथुरा, जागरण संवाददाता। बरसाना थाना क्षेत्र के गांव जानू के जंगल में टटलू की हत्या शातिरों के बीच गैंगवार में नहीं बल्कि एक फौजी ने साथी के साथ गोली मारकर की थी। रविवार को पुलिस ने इस सनसनीखेज घटना से पर्दा हटाते हुए फौजी के साथी को गिरफ्तार कर लिया है। फौजी अभी फरार है। दोनों को टटलुओं ने बुलट मोटरसाइकिल खरीदने बुलाया था। लूटपाट के दौरान फौजी ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से फायरिग कर दी थी।

बरसाना थाना क्षेत्र के गांव जानू के जंगल में 28 अगस्त को हुई फायरिग में गांव हाथिया निवासी जमील उर्फ जम्मी की गोली लगने से मौत हो गई थी। उसका साथी आसिफ भी घायल हो गया था। प्रारंभ में जमील (मृतक) के पिता हाईक ने बताया कि जमील अपने साथी आसिफ के साथ गांव भीमलका को जा रहा था। तब घात लगाकर हाथिया के शकील ने साथियों के साथ दोनों पर हमला बोल दिया। हाईक ने गांव के जुबैर, अरसद, शकील, मुबारिक पुत्रगण इज्जत मेव निवासी हाथिया को जमील की हत्या में नामजद कराया था। चारों की गिरफ्तारी पर पुलिस ने पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया था।

--ये थी असलियत:

एसएसपी शलभ माथुर ने पुलिस लाइन में पत्रकारों को बताया कि तहकीकात में जमील की हत्या के पीछे दूसरी कहानी निकल कर सामने आई। जमील टटलूबाजी करता था। ओएलएक्स पर बुलट मोटरसाइकिल की बिक्री की सूचना अपलोड कराई थी। इससे ही उन्नाव जिले के थाना बीघापुर के गांव मानपुर निवासी धर्मवीर सिंह और अनीश जमील के संपर्क में आए। 28 अगस्त को दोनों यहां मोटरसाइकिल खरीदने को आए। लूटपाट के दौरान फौजी धर्मवीर सिंह ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से जमील को गोली मार दी। नामजद लोगों की लोकेशन घटना स्थल पर नहीं मिली। फौजी धर्मवीर और अनीश संदेह के घेरे में आ गए। अनीश को पुलिस ने स्थानीय बस स्टेंड से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में अनीश ने ये राज खोला। जमील उर्फ जुल्ल उर्फ जुम्मी अपने साथी रफीक, जुबैर उर्फ कोकिला और अशरफ के साथ टटलू बाजी करता था। एसएसपी ने बताया कि फौजी की कश्मीर में तैनात है। उसकी यूनिट को हत्या में वांछित होने की सूचना भेज दी गई है। हाईके ने जिन लोगों को नामजद कराया था, उस मुकदमा को खारिज किया जा रहा है। टटलूबाजी में संलिप्त जमील और साथियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखी गई है। हत्या के मुकदमा को गैर इरादतन हत्या में तरमीम किया गया है। एसपी देहात आदित्य कुमार शुक्ला, एसपी सुरक्षा ज्ञानेंद्र कुमार, एसपी ट्रैफिक डॉ. ब्रजेश कुमार, सीओ जगदीश कालीरमन, अंकुल अग्रवाल, राकेश कुमार मौजूद रहे।

तब बच जाता फौजी: एसएसपी ने बताया कि फौजी ने आत्मरक्षा के लिए गोली चलाई होगी, लेकिन उसकी सूचना उसने पुलिस को नहीं दी और घटना स्थल से फरार हो गया। इसके बाद फौजी ने अपनी यूनिट में आमद करा ली। अगर, घटना के बाद पुलिस को पूरा घटनाक्रम बता दिया गया होता तो फौजी बच सकता था।

Posted By: Jagran

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