जागरण संवाददाता,मथुरा: शाही मस्जिद ईदगाह में लड्डू गोपाल को जलाभिषेक करने के एलान को वापस कराकर प्रशासनिक अधिकारी अभी ढंग से राहत की सांस भी नहीं ले पाए होंगे। मंगलवार को अखिल भारत हिदू महासभा ने जिला प्रशासन से शाही मस्जिद ईदगाह में लड्डू गोपाल की आरती करने की अनुमति मांगी है। विश्व मानवाधिकार दिवस 10 दिसंबर को 10 मिनट अनुमति के लिए डीएम को ई मेल भेजा है। अनुमति न मिलने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

अखिल भारत हिदू महासभा ने पूर्व में शाही मस्जिद ईदगाह में लड्डू गोपाल को ले जाकर छह दिसंबर को जलाभिषेक करने का एलान किया था। कुछ संगठनों ने पदयात्रा निकालने का भी एलान किया था। प्रशासन के दबाव में ये कार्यक्रम स्थगित कर दिए। फिर भी छह दिसंबर को कड़ी चौकसी रखी गई। मंगलवार को महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यश्री चौधरी ने एक वीडियो संदेश जारी किया है। इसमें कहा कि डीएम को ई-मेल से पत्र भेजकर 10 दिसंबर विश्व मानवाधिकार दिवस के दिन शाही मस्जिद ईदगाह में लड्डू गोपाल की आरती करने की अनुमति मांगी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने अनुमति नहीं दी, तो इसके विरोध में पूरे देश में कृष्ण प्रेमियों की राय के मुताबिक आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।

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अखिल भारत हिदू महासभा के प्रार्थना पत्र को देखा जाएगा। यदि उनके द्वारा आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम से जिले की शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, तो ऐसे किसी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जाएगी।

नवनीत सिंह चहल, डीएम। मुख्यमंत्री से की ब्रजभाषा अकादमी की मांग: उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मांट आगमन पर ब्रजभाषा अकादमी की स्थापना की मांग की है। ब्रज के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विकास की अन्य योजनाओं को स्वीकृति प्रदान करने की मांग भी की है।

उन्होंने कहा है कि ब्रजभाषा केवल ब्रज क्षेत्र में ही नहीं भरतपुर, धौलपुर, मुरैना, होडल, पलवल आदि में भी बोली जाती है। अन्य भाषाओं की तुलना में सबसे अधिक माधुर्यमयी भाषा है, जिसमें बाल कृष्ण ने मैया यशोदा से माखन मांगा था। भाटिया ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश में ब्रजभाषा की तुलना में कम बोली जाने वाली उर्दू, सिधी, पंजाबी की अकादमी हैं, लेकिन ब्रजभाषा अकादमी नहीं है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश हिदी संस्थान, उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान आदि में भी ब्रज का प्रतिनिधित्व नहीं है। उपेक्षा के कारण ब्रज के ग्रामीण अंचल में बिखरी सांस्कृतिक निधियां समाप्त होती जा रही हैं।

Edited By: Jagran