जागरण संवाददाता, मथुरा (वृंदावन): अ‌र्द्ध चंद्राकार पुल पूरा होने का सपना देख रहे नगरवासियों को शासन ने जोर का झटका दिया है। शासन ने पुल के लिए खड़े किए गए सभी पिलरों को तोड़ने का निर्णय लिया है। पहले इनको बनवाने में लाखों रुपये खर्च किए गए अब इसे तोड़ने में धन पानी की तरह बहाया जाएगा।

सरकारी पैसे के दुरुपयोग की बानगी है यमुना में निर्माणाधीन अ‌र्द्ध चंद्राकार पुल। प्रदेश सरकार ने इसे पूरा कराने के बजाय अब तुड़वाने का निर्णय लिया है। तकरीबन आठ साल पहले तत्कालीन बसपा सरकार ने वृंदावन प्रोजेक्ट में यमुना के ऊपर श्रृंगारघाट से लेकर केसीघाट तक तकरीबन एक किलोमीटर लंबा अ‌र्द्ध चंद्राकार पुल बनवाने का निर्णय लिया था। 2008 में इसका निर्माण शुरू हुआ। समाजसेवी मधु मंगल शुक्ल ने आरटीआइ में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग आगरा से जानकारी मांगी थी कि क्या भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित मदन मोहन मंदिर और युगल किशोर मंदिर के बीच यमुना के फ्लड एरिया में अ‌र्द्ध चंद्राकार पुल का निर्माण कराया जाना कानूनी है? इसका जवाब न मिलने पर उन्होंने निर्माण कार्य के खिलाफ 2010 में हाईकोर्ट की शरण ली।

हाईकोर्ट ने निर्माण के खिलाफ स्टे ऑर्डर जारी कर दिया। प्रशासन की तरफ से पैरवी होने पर स्टे ऑर्डर हाईकोर्ट ने वापस ले लिया। मगर, प्रशासन ने पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया। वर्तमान में यमुना में तकरीबन 20 फुट लंबे 12 पिलर खड़े हैं। इनके निर्माण होने से यमुना की धारा घाट किनारे से काफी दूर हो गई है। बीती अप्रैल में केसीघाट आए शासन के वरिष्ठ अफसर आरडी पालीवाल ने इनको तुड़वाने के संकेत दिए थे। अब शासन ने इन पिलरों को तुड़वाने का निर्णय ले लिया है।

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