मथुरा (कोसीकलां): ब्रजराज भगवान श्री कृष्ण की द्वारिका लीलाओं से संबंधित पौराणिक रत्नाकर सागर बदहाल है। गंदगी के साथ अतिक्रमण भी इसकी बड़ी वजह है।

करीब तीन एकड़ भूमि में स्थित इस सरोवर का पौराणिक महत्व है। कभी बेहद दिव्य रहे इस कुण्ड का जल आज आचमन योग्य तो क्या छूने योग्य भी नहीं रह गया है। ब्रज चौरासी कोस यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु कुण्ड से आचमन करना नहीं भूलते थे। जानकार बताते हैं इसका पौराणिक इतिहास भगवान श्री कृष्ण द्वारा अपने ब्रजवासियों की दिखाई द्वारिका लीला से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि भगवान ने ब्रजवासियों के लिए अधिकतर सभी तीर्थों को ब्रज में ही उतार दिया था। कोसीकलां में रत्नाकर सागर के अलावा गोमती गंगा एवं क्षीर सागर जैसे स्थानों के दर्शन कराए थे।

आज रत्नाकर सरोवर के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। चारों ओर घाटों एवं छतरियों पर ही नहीं कुंड में कूड़ा डालकर अतिक्रमण किया हुआ है। कई नाले एवं नालियों का गंदा पानी भी इसमें आता है। जिससे अब कुंड के पास खड़ा होना भी दूभर हो जाता है।

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