जागरण संवाददाता, मैनपुरी: छात्रा हत्याकांड के बाद स्कूल की निलंबित और नामजद प्रधानाचार्य सुषमा सागर ढाई माह से लापता हैं। पुलिस, एसटीएफ ने तो उनसे पूछताछ की जरूरत समझी ही नहीं, एसआइटी ने भी अब तक उन्हें बयान देने नहीं बुलाया है। छात्रा के स्वजन जांच एजेंसियों की इस 'मेहरबानी' पर हैरान हैं।

प्रधानाचार्य ने ही छात्रा के स्वजनों को सूचना दिए बिना शव को अस्पताल पहुंचाया था। इस मामले में छात्रा के स्वजनों की ओर से दर्ज रिपोर्ट में प्रधानाचार्य सुषमा सागर भी नामजद थीं। रिपोर्ट दर्ज होने के अगले दिन ही वे लापता हो गई थीं। स्कूल प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था।

घटना के बाद से ही पुलिस और एसटीएफ जांच कर रही थी। अब एसआइटी जांच कर रही है। छात्रा के माता-पिता का आरोप है कि निलंबित प्रधानाचार्य को अब तक किसी भी जांच एजेंसी ने बयान देने नहीं बुलाया है। नामजद होने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई है। जबकि हम इस बाबत जांच एजेंसियो से कई बार शिकायत कर चुके हैं। बुधवार को एसआइटी को बयान देते समय भी हमने अपनी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि ये भी नहीं पता कि सुषमा सागर आखिर हैं कहां? पीड़ित माता-पिता ने मांग की कि मामले में प्रधानाचार्य और विद्यालय में रहने वाले उसके परिवार के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ होनी चाहिए। मिल चुकी है विभागीय चार्जशीट

निलंबन के बाद सुषमा सागर को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। सुषमा सागर ने वहां रिपोर्ट भी कर चुकी हैं। विभागीय स्तर से सुषमा सागर को चार्जशीट भी जा चुकी है, अब विभागीय जांच भी शुरू होने जा रही है।

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