जागरण संवाददाता, मैनपुरी: बात संस्कारों की हो या फिर अभिव्यक्ति की आजादी की। बच्चों की कलम खूब चली। हर सवाल पर दिल खोलकर जवाब दिया। मौका था जागरण की संस्कार शाला की परीक्षा का। गुरुवार को शहर के आगरा रोड स्थित लॉर्ड कृष्णा एजूकेशनल एकेडमी में परीक्षा आयोजित हुई। सात सौ से अधिक बच्चों ने परीक्षा दी। पहले सवालों को लेकर वह कुछ अटके, लेकिन फिर याद करते रहे और कलम चलती रही। परीक्षा शुरू होने से पहले सवालों को लेकर डर था। लेकिन जब प्रश्नपत्र सामने आया, तो डर कम हो गया। हां, सवाल जरूर पाठ्यक्रम से अलग थे। संस्कारशाला की परीक्षा में महिला सशक्तीकरण, गैजेट, सोशल नेटवर्किंग, इंटरनेट, भाषा का विकास, पढ़ने की आदत, अन्न का अनादर, युवा वर्ग और टेक्नोलॉजी से संबंधित सवाल पूछे गए थे।

क्या कहते हैं बच्चे

जागरण संस्कारशाला की परीक्षा से हमें काफी ज्ञान मिला। इसमें संस्कार की बातें हैं तो संस्कृति की भी। इस परीक्षा से जीवन में नई सीख मिलती है। निश्चित ही ये हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।

संस्कारशाला की परीक्षा हमें नैतिक मूल्यों का अहसास कराती है। ऐसी परीक्षाओं से हमें सामाजिक व नैतिक मूल्यों की जानकारी तो होती ही है, हमें उनका पालन करने की भी सीख मिलती है।

ऐसी परीक्षाएं व्यक्तित्व के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। जरूरी हैं कि समय-समय पर ऐसी परीक्षाएं होती रहीं। हमें कई नई जानकारियां मिलती हैं।

ये परीक्षा हमारे नैतिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। इससे निश्चित रूप से हमें संस्कारों का ज्ञान होता है। हमें नई सीख इनसे मिलती है।

बच्चों के जीवन में विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें किताबी ज्ञान के साथ ही नैतिक ज्ञान हो। जागरण संस्कारशाला की परीक्षा निश्चित रूप से बच्चों के सामाजिक मूल्यों के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

शशांक गुप्ता, प्रबंध निदेशक, लॉर्ड कृष्णा एजूकेशनल एकेडमी।

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