जागरण संवाददाता, मैनपुरी: पुलवामा हमले में शहीद जिले के जाबांज को पूरा गांव याद करेगा। शहादत की बरसी 14 फरवरी को गांव वाले शहीद मेला और सम्मान समारोह का आयोजन करने जा रहे हैं। इसमें जिले भर से लोगों के शामिल होने की संभावना है।

बरनाहल कस्बे के गांव विनायकपुर के रामवकील सीआरपीएफ की 178वीं बटालियन में तैनात थे। पुलवामा हमले में उन्होंने शहादत दी। सेना में अपनी अदम्य जाबांजी से दिल जीतने वाले इस जवान की शहादत पर गांव वालों को गर्व है तो उनकी सहयोग भावना को भूले नहीं हैं।

शहादत दिवस 14 फरवरी को गांव में शहीद मेला का आयोजन होगा। शहीद के भतीजे शिवकुमार ने बताया कि पूरे गांव के सहयोग से यह कार्यक्रम किया जा रहा है। समारोह सुबह 10 बजे से शुरू होगा। आयोजन समिति ने डीएम और एसपी को भी आमंत्रण दिया है। समारोह में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। गांव में ही खेतीबाड़ी करने वाले रामवकील के साथी बताते हैं कि वह दोस्तों के बीच लोकप्रिय थे। नौकरी से पहले भी वह मदद के लिए तत्पर रहते थे। उनकी अंतिम विदाई में हजारों की भीड़ उमड़ी थी।

सब जगह मिलता है सम्मान:

शहीद के भाई रामनरेश को दुख है कि उन्होंने अपना भाई खो दिया। साथ ही कहते हैं कि उन्हें अपने भाई पर गर्व है। गांव और समाज में हमें सब सम्मान की नजर से देखते हैं।

पहले पिता का सपना, फिर बनूंगा सैनिक: शहीद रामवकील पुत्र अंकित को फुटबॉलर बनते देखना चाहते थे। वही, उसे टेस्ट के लिए आगरा ले गए थे। उन्हीं के सामने परीक्षा देकर ट्रेनिग के लिए अंडर 12 में चयनित हो गया बेटा कहता है कि पहले वह पापा की इच्छा पूरा करने को फुटबालर बनेगा। इसके बाद सेना में भर्ती होकर आतंकवादियों का सफाया करेगा।

संयुक्त परिवार की मिसाल है शहीद का घर

शहीद के पिता मुंशीलाल की कई साल पहले ही मौत हो चुकी है। शहीद का भाई रामनरेश और मां अमितश्री गांव में ही रहते हैं। दोनों भाइयों का परिवार संयुक्त है। शहीद की पत्नी गीता देवी ग्राम विकास विभाग इटावा में लिपिक हैं। सबसे बड़ा पुत्र अंकित गुरू गोविन्द सिंह स्पो‌र्ट्स कालेज लखनऊ में पढ़ रहा है। उससे छोटा बेटा अर्पित सहवाग इंटरनेशनल स्कूल झझर हरियाणा में अध्ययनरत है। सबसे छोटा बेटा अंश डीपीएस इटावा में पढ़ता है।

रास्ते के विवाद में अधूरा पड़ा है शहीद स्मारक

शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए प्रदेश के मंत्री सत्यदेव पचौरी ने शहीद स्मारक के लिए पांच बीघा का पट्टा आवंटित किया था। यहां शहीद स्मारक का निर्माण होना है। मगर, स्मारक स्थल तक पहुंचने को रास्ता ही नहीं है। डेढ़ माह पूर्व शहीद की पत्नी ने राज्यपाल आनन्दी बेन से मिलकर शिकायती पत्र दिया था। रास्ते की जगह न मिल पाने के कारण काम अब तक अधूरा है।

Posted By: Jagran

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