जागरण संवाददाता, मैनपुरी: निलंबित ग्राम विकास अधिकारी की बर्खास्त किए जाने संबंधी पत्रावली गायब होने के मामले में मुख्य विकास अधिकारी ने शुक्रवार को प्रधान लिपिक को निलंबित कर दिया। निलंबित कर्मचारी पर पत्रावली को निलंबित जिला विकास अधिकारी द्वारा ले जाने की सूचना न देने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रधान सहायक को करहल ब्लाक संबद्ध कर जांच उपायुक्त मनरेगा को सौंपी गई है।

विकास भवन में इन दिनों निलंबित जिला विकास अधिकारी प्रवीण कुमार राय के कारनामे चर्चित हो रहे हैं। अब उनके एक कारनामे की गाज प्रधान सहायक शैलेंद्र कुमार सक्सेना पर गिर गई है। मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने प्रधान सहायक को रिकार्ड का रखरखाव बेहतर तरीके से न करने, निलंबित ग्राम विकास अधिकारी नरेश भारती की पत्रावली को निलंबित जिला विकास अधिकारी द्वारा साथ ले जाने की सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। जानकारों ने बताया कि निलंबित प्रधान सहायक कोरोना संक्रमण से मृत जिला ग्राम विकास अभिकरण के टंकण सहायक शिवराम के स्वजन को नियुक्ति देने के लिए जारी शासनादेश के विरुद्ध टिप्पणी कर रहे थे। सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी कार्यालय के प्रधान सहायक को निलंबित कर करहल ब्लाक से संबद्ध कर दिया है, जबकि मामले की जांच मनरेगा उपायुक्त पीसी राम को सौंपी गई है। जिला विकास अधिकारी कार्यालय का प्रधान सहायक फाइलों का रखरखाव सही नहीं कर रहा था। मृत डीआरडीए कर्मी के आश्रित को नौकरी में सेवायोजित करने में तमाम अवरोध उत्पन्न कर रहा था, इसलिए निलंबित कर दिया गया है। निलंबित डीडीओ ने स्वीकारा फाइल उनके पास?

विकास भवन के जानकारों का कहना है कि शुक्रवार को निलंबित जिला विकास अधिकारी प्रवीण कुमार राय ने बिना पत्रांक नंबर का एक पत्र जारी किया है। खुद को जिला विकास अधिकारी दर्शाते हुए निलंबित सचिव नरेश भारती की फाइल साथ ले जाने की बात स्वीकारी है। ग्राम विकास अधिकारी ने ली हाईकोर्ट की शरण

निलंबित जिला विकास अधिकारी द्वारा नियम विरुद्ध बर्खास्त किए गए ग्राम विकास अधिकारी नरेश कुमार भारती ने अब न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली है।

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