श्रवण शर्मा, मैनपुरी: पंचायत चुनाव में आंकड़े कई मायने में चौंकाने वाले हैं। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशियों ने धमाकेदार जीत हासिल की है। अनारक्षित सीटों पर भी बाजी अपने नाम की है। जिला पंचायत के अनारक्षित 11 वार्ड में से आठ में पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशियों ने जीती हैं। महिला वर्ग की सीट पर भी इसी वर्ग की महिलाओं को फतह मिली है।

30 सदस्यों वाली जिला पंचायत में आरक्षण के तहत छह पद अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग को आठ, महिला को पांच और 11 पद अनारक्षित तय किए गए थे। पंचायत चुनाव की मतगणना के बाद जारी परिणाम में सर्वाधिक फायदे में पिछड़ा वर्ग ही रहा। इसे कुल 18 सीटों पर जीत हासिल हुए है। पिछड़ा वर्ग के हिस्से आठ आरक्षित सीट तो आई ही हैं। साथ ही, उसने अनारक्षित 11 सीट में से आठ पर जीत हासिल की। साथ ही महिला के लिए आरक्षित पांच सीट में से दो पर पिछड़ा वर्ग की महिला ने जीती हैं।

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यह वार्ड थे अनारक्षित:

शासन ने जिला पंचायत के वार्ड किशनी द्वितीय, किशनी चतुर्थ, सुल्तानगंज द्वितीय, कुरावली द्वितीय, घिरोर प्रथम, घिरोर चतुर्थ, बरनाहल प्रथम, बरनाहल द्वितीय और बरनाहल तृतीय के अलावा करहल प्रथम, करहल द्वितीय को अनारक्षित घोषित किया था।

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अनारक्षित पदों पर जीते यह-

जिला पंचायत के अनारक्षित 11 वार्ड में से आठ पद तो पिछड़ा वर्ग के कब्जे में चले गए। ऐसे अनारक्षित वार्ड दो किशनी द्वितीय से पिछड़ा वर्ग के गजराज सिंह, वार्ड दस सुल्तानगंज द्वितीय से उजागर सिंह, वार्ड 14 कुरावली द्वितीय से शिवम, वार्ड 16 घिरोर प्रथम से यदुवंश सिंह, वार्ड 19 घिरोर चतुर्थ से सुजान सिंह, वार्ड 20 बरनाहल प्रथम से रघुराज सिंह, वार्ड 22 बरनाहल तृतीय से रेनू, वार्ड 24 करहल द्वितीय से लालू यादव जीते। इन अनारक्षित पदों में से केवल तीन पर अनारक्षितों को जीतने का सौभाग्य मिला।

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महिला सीट पर भी तीन ने मारी बाजी-

जिला पंचायत के पांच वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित थे। इन पांच में से केवल तीन अनारक्षित वर्ग की महिलाओं के हाथ लगे। इन अनारक्षित वर्ग की जीतने वाली महिलाओं में घिरोर द्वितीय से अर्चना, मैनपुरी तृतीय से सुमन देवी चौहान, जागीर प्रथम से सारिका शामिल हैं।

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जिला पंचायत में जातिवार दबदबा-

अनुसूचित जाति: छह

पिछड़ा वर्ग: 18

अनारक्षित: छह

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'अनारक्षित पदों पर किसी भी वर्ग को चुनाव लड़ने का अधिकार होता है। वार्ड में ऐसी जाति के मतदाताओं का ज्यादा प्रभुत्व होने से पिछड़ा वर्ग को सबसे ज्यादा सफलता मिली हैं।'

-स्वामीदीन, जिला पंचायत राज अधिकारी

Edited By: Jagran