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औंछा, संवादसूत्र। तीन माह पहले गायब हुआ पप्पू निवासी गांव गुराई थाना औंछा का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि वह हरियाणा में अपने बड़े भाई के पास रहकर प्राइवेट नौकरी कर रहा था। दूसरी ओर अपहरण के मामले में नामजद पुलिस से छिपते घूम रहे थे। शनिवार को पुलिस ने राजफाश किया तो अपहरण के आरोपितों ने राहत की सांस ली।

थाना औंछा के गांव नगला भमी निवासी कायम सिंह के नलकूप का स्टार्टर मई 2019 में चोरी चला गया था। कायम सिंह को पप्पू निवासी गांव गुराई पर स्टार्टर चोरी करने का संदेह था। 27 जुलाई को पप्पू लापता हो गया। पप्पू के छोटे भाई सुग्रीव ने कायम सिंह, सर्वेश, गयाराम और ददा निवासीगण औंछा पर पप्पू के अपहरण करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी। पुलिस को घटना संदिग्ध प्रतीत हो रही थी। इसलिए मामला दर्ज करने में टालमटोल की गई। सुग्रीव ने आलाधिकारियों की शरण ली। उच्चाधिकारी के आदेश पर दो जुलाई को चारों आरोपितों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया। पुलिस ने चारों की तलाश शुरू कर दी तो आरोपित पुलिस से बचने के लिए भूमिगत हो गए। खुद को निर्दोष साबित करने के लिए आलाधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजते रहे। पुलिस ने आरोपितों की तलाश के साथ ही घटना की सच्चाई पता लगाने के लिए सर्विलांस का सहारा लिया तो पप्पू के हरियाणा के फरीदाबाद में मौजूद होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने सारी जानकारियां हासिल करने के बाद शनिवार सुबह पप्पू को पकड़ लिया। पूछताछ में पप्पू ने बताया कि वह स्टार्टर चोरी के आरोप से बचने के लिए घर से भाग आया था। फरीदाबाद में बड़े भाई सहदेव के पास रहकर एक कंपनी में नौकरी कर रहा था। पुलिस उसे लेकर थाने आ गई है। शाम तक पप्पू से पूछताछ की जा रही थी। इंस्पेक्टर औंछा ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। झूठी रिपोर्ट लिखाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

Posted By: Jagran

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