जासं, मैनपुरी : जिले में बुखार से हालात अब बिगड़ते जा रहे हैं। एक मासूम की भी मौत मौत हो गई जबकि सैकड़ों की संख्या में बच्चे बीमार हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में भी बच्चों की संख्या 150 के पार पहुंच रही है। इनमें सर्वाधिक बुखार से पीड़ित आ रहे हैं।

बुखार से स्थितियां काबू में नहीं आ रही हैं। मंगलवार को गांव रठेरा निवासी शीतल (आठ माह) पुत्री प्रवीण की बुखार की वजह से मौत हो गई। मासूम तीन दिनों से बुखार से बीमार थी। स्वजन निजी चिकित्सक से उपचार दिला रहे थे। जिला अस्पताल की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है।

मंगलवार को ओपीडी में सबसे ज्यादा भीड़ बच्चों की पहुंची। बाल रोग विशेषज्ञ डा. डीके शाक्य का कहना है कि पहले जहां 50 से 70 बच्चे आते थे, अब अचानक 150 तक संख्या पहुंच रही है। ज्यादातर बच्चे बुखार से बीमार हैं। कई को अस्पताल में भर्ती रखकर उपचार भी दिया जा रहा है। अन्य कमरों की स्थिति बदतर रही। ज्यादातर चिकित्सक अपने कमरों में बैठे ही नहीं थे। जिसकी वजह से मरीजों को इंतजार करना पड़ा।

जांच को मना किया तो भड़क गए मरीज

मंगलवार को मंछना निवासी शीलेंद्र चौहान जिला अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे थे। पांच दिनों से बुखार की समस्या होने की बात कर चिकित्सक ने सीबीसी जांच के लिए लिख दिया। शीलेंद्र का आरोप है कि उन्होंने जब चिकित्सक से डेंगू की जांच कराने के लिए कहा तो चिकित्सक ने यह कहकर मना कर दिया कि अस्पताल प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी मरीज की डेंगू जांच नहीं होगी। इस पर दूसरे मरीजों ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए अस्पताल प्रशासन से इसका जवाब मांगा। प्रभारी सीएमएस डा. अशोक कुमार का कहना है कि इस संबंध में उन्हें कुछ जानकारी नहीं है।

डेंगू मरीजों की छिपाई जा रही जानकारी

अस्पताल प्रशासन द्वारा डेंगू से संबंधित मरीजों की जानकारी अब छिपाई जा रही है। अस्पताल के हर एक कमरे में बुखार से पीड़ित मरीज को भर्ती किया गया है। उपचार भी डेंगू का ही दिया जा रहा है, लेकिन कुल कितने मरीज भर्ती हैं और कितने ठीक होकर घर जा चुके हैं, इसके बारे में अस्पताल प्रशासन कुछ भी बताने से स्पष्ट मना कर रहा है।

डीएम ने लगाई फटकार

दोपहर बाद डीएम महेंद्र बहादुर सिंह जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डेंगू वार्ड में भर्ती मरीजों से उनकी सेहत की जानकारी की और बाद में अस्पताल प्रशासन को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई। फटकार लगाते हुए कहा कि जो भी मरीज उपचार के लिए आएं, उन्हें हर हाल में संतुष्ट किया जाए। किसी भी मरीज को परेशान न करें। मरीजों की बीमारी के बारे में उनके स्वजन को जरूर बताएं।

Edited By: Jagran