जागरण संवाददाता, मैनपुरी : दन्नाहार के गुड्डू की हत्या की जांच ने पुलिस पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले तो गुड्डू के शव को लेकर खींचतान रही। फिर परिजनों ने शव की पुष्टि के लिए डीएनए जांच की मांग कर दी। पुलिस परिजनों को भरोसा देती रही। परिजन डीएनए जांच की उम्मीद लगाए बैठे रहे और पुलिस ने गुपचुप चार्जशीट दाखिल कर दी। गुड्डू की उम्र और मिले शव की उम्र में काफी अंतर है। इसलिए वारदात को अदालत में साबित करना मुश्किल होगा।

थाना दन्नाहार के नगला आशा निवासी गुड्डू (23) 19 जुलाई 2017 को घर पर थे। तभी गुड्डू का दोस्त ¨पटू निवासी नायकूंड वहां पहुंचा और गांव रठेरा तक साथ चलने को कहा। वह अपनी बाइक लेकर ¨पटू के साथ चले गए, फिर नहीं आए। काफी तलाश के बाद भी गुड्डू का पता नहीं चला। गुड्डू की मां शकुंतला देवी ने थाने में तहरीर दी। पुलिस ने ¨पटू को हिरासत में लिया। ¨पटू ने स्वीकार किया कि गुड्डू के उसकी पत्नी से अवैध संबंध थे, इसलिए उसको मार डालने की योजना बनाई थी। घर से ले जाकर गुड्डू को काफी शराब पिलाई। वह काफी नशे में हो गया, तो उसे गांगसी पुल के पास नहर में फेंक दिया। बाइक भी नहर में डाल दी। पुलिस ने बताए गए स्थान से बाइक बरामद कर ली।

शव की तलाश शुरू की गई। एक अगस्त 2017 को बुझिया पुल के पास नहर में एक शव बरामद हुआ। परिजनों ने शव की पहचान गुड्डू के रूप में की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। चिकित्सकों ने बताया कि इस शव का पहले ही पोस्टमार्टम हो चुका है। इसके बावजूद पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने को कहा। चिकित्सकों ने शव की उम्र 35 वर्ष बताई तो शव की पहचान को लेकर संदेह हो गया। परिजनों के अनुसार गुड्डू की आयु सिर्फ 23 वर्ष थी। पहचान के लिए डीएनए जांच कराने का निर्णय लिया गया। चिकित्सकों ने डीएनए का नमूना लेकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। गांव के लोगों ने कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पर जमकर हंगामा किया। पुलिस पर पथराव किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया। पुलिस ने गुड्डू के परिजनों को बुलाकर शव का अंतिम संस्कार कराया।

परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन गुड्डू का शव बरामद करने की मांग करने लगे। पुलिस शव को गुड्डू का होने का दावा कर रही थी। परिजनों ने डीएनए टेस्ट की मांग की। घटना की जांच कर रहे तत्कालीन एसओ एलाऊ राजेश कुमार यादव जांच का आश्वासन देते रहे, लेकिन जांच नहीं कराई। घटना के ढाई महीने बाद 14 अक्टूबर 2017 को ¨पटू के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी गई। परिजनों से ये ही कहा गया कि जल्द डीएनए जांच करा ली जाएगी।

शुक्रवार को दैनिक जागरण ने गुड्डू की मां को बताया कि पुलिस बिना डीएनए जांच के ही कोर्ट में चार्जशीट पेश कर चुकी है, तो वे हैरान रह गईं। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता। होली से दो दिन पहले भी दरोगा उदय शर्मा उसे डीएनए का नमूना लेने के लिए थाने पर बुलाकर लाए थे। उस दिन नमूना नहीं लिया गया। तीन माह बाद फिर आने के लिए कहा गया था। शकुंतला देवी ने बताया कि वह डीएनए का नमूना देने के लिए थाने जाने वाली थी। गुड्डू की बहन नीतू ने बताया कि डीएनए जांच हो जाती तो सच्चाई पता लग जाती। अब उसे कभी पता नहीं लगेगा कि शव किसका था। - कानूनी राय

हत्या के मामले में शव का बरामद होना महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताई गई उम्र व गायब युवक की उम्र में अंतर होने से बरामद शव को गुड्डू का शव साबित करना काफी कठिन हो जाएगा। पुलिस को डीएनए की जांच करानी चाहिए। ताकि शव की पहचान को लेकर कोर्ट के सामने स्थिति साफ हो सके।

अजीत नरायन ¨सह चौहान, एडवोकेट - अधिकारी कहिन

मामले की जांच कराई जाएगी। डीएनए का नमूना कहां है पता लगाया जाएगा। आवश्यकता होगी तो डीएनए जांच कराई जाएगी।

सुनील कुमार यादव, थानाध्यक्ष दन्नाहार

Posted By: Jagran

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