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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बुखार हुआ जानलेवा, दो बच्चों की मौत

By JagranEdited By:
Published: Wed, 08 Aug 2018 11:16 PM (IST)

बुधवार को मैनपुरी के जिला अस्पताल में 1347 मरीज पहुंचे। 40 फीसद बुखार के मरीज टाईफाइड से पीड़ित मिले।

बुखार हुआ जानलेवा, दो बच्चों की मौत
बुखार हुआ जानलेवा, दो बच्चों की मौत

जागरण संवाददाता, मैनपुरी: बुखार अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। अस्पताल पहुंच रही मरीजों की जांच में 40 फीसद से अधिक मरीज टाईफाइड से पीड़ित हैं। बुखार से होने वाली मौतों का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार रात को और दो बच्चों की बुखार से मौत हो गई। झोलाछाप के इलाज से हालत में सुधार न होने पर जब तक परिजन उन्हें अस्पताल लेकर आए तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया।

बदलते मौसम में सबसे अधिक मरीज बुखार, दस्त और पेट संबंधी रोगों के आ रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 1300 मरीज पहुंचे रहे हैं। इनमें से 60 फीसद मरीज बुखार से पीड़ित हैं। इनकी जांच में अधिकांश टाईफाइड से पीड़ित पाए जा रहे हैं। झोलाछाप के इलाज से भी इनकी हालत बिगड़ रही है। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार गांव खिरिया निवासी धर्मवीर ¨सह के 10 वर्षीय पुत्र विकास को मंगलवार रात आठ बजे परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने बताया कि विकास को एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। क्षेत्र के डॉक्टरों से इलाज करा रहे थे। मंगलवार को जब हालत बिगड़ी तो वे उसे जिला अस्पताल लेकर आए थे। वहीं गांव उस्मानपुर निवासी महेंद्र के 16 वर्षीय पुत्र रजत को बुधवार सुबह साढ़े चार बजे जिला अस्पताल ला गया था, वह भी बुखार से पीड़ित था। जिला अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी भी मौत हो गई। इन दो मौतों के साथ बीते एक सप्ताह में बुखार से मरने वाले लोगों की संख्या आठ हो गई है। ये आंकड़े तो केवल जिला अस्पताल आने वाले मरीजों के हैं। जबकि क्षेत्र में जो मौतें हो रही हैं, उनका विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। बुखार के अलावा पेट दर्द और दस्त से भी लोग पीड़ित हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके सागर ने बताया कि बुखार व अन्य जरूरी दवाएं जिला अस्पताल में उपलब्ध हैं। मरीजों के लिए सभी प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मरीज किसी भी हालत में झोलाछाप से उपचार न कराएं।

मरीजों की संख्या अधिक होने से बढ़ी परेशानी

जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव अधिक होने से परेशानी बढ़ गई है। पर्चा काउंटर और दवा काउंटर पर घंटों लाइन लगाने के बाद मरीजों का नंबर आ रहा है। अस्पताल में दो फिजीशियन होने के चलते भी उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि दवाओं की फिलहाल पर्याप्त उपलब्धता है।

झोलाछापों की चल पड़ी दुकानें

बुखार फैलने के साथ ही झोलाछाप और दवाओं की दुकानें भ चल पड़ी हैं। रोजाना सैकड़ों मरीज झोलाछापों के यहां उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। ये झोलाछाप मरीजों की ¨जदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। दवा की दुकानों से से¨टग कर महंगी दवाएं लिखी जा रही हैँ। स्वास्थ्य विभाग भी इस खेल को अनदेखा किए हुए है।

ये रखें सावधानी

- साफ पानी पिएं।

- बारिश से बचाव रखें।

- बुखार आने पर तुरंत उपचार कराएं।

- बाजार के भोजन से परहेज करें।

- खून की जांच के बगैर कोई दवा न लें।

मरीजों की बात

एक सप्ताह से बुखार इलाज चल रहा है, अभी कोई फायदा नहीं हुआ। यहां लाइन में कई घंटे गुजर जाते हैं।

प्रियंका, पुलंदर की बगिया।

दवा काउंटर पर भीड़ इतनी अधिक है कि एक घंटे से लाइन में लगे हैं, लेकिन दवा नहीं मिल सकी।

संदीप कुमार, भरतवाल।

कई दिनों से बुखार आ रहा है। जिला अस्पताल में जांच कराई तो पता चला कि टाईफाइड है। डॉक्टर ने दवा लिखी है।

पूजा कश्यप, महेंद्र नगर।

चार दिन पहले बुखार आना शुरू हुआ था। पहले मेडीकल स्टोर से से गोली ले ली। बुखार नहीं उतरा, इसलिए जिला अस्पताल आया हूं।

पंचम लाल, भोगांव।

करहल सीएचसी पर दवाओं का टोटा

संवाद सूत्र, करहल : करहल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह महीनों से दवाओं का टोटा है। प्राथमिक उपचार को भी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक यादव ने बताया कि छह महीने से पैरासीटामोल, एंटी डाइरियल, डाइक्लोफेनेक, मेट्रोजिल आदि जरूरी दवाएं भी नहीं है। कई बार डिमांड भेजी गई, लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी। जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का हाल भी इससे जुदा नहीं है। सभी जगह दवाओं की कमी मरीजों की परेशानी का कारण बन रही है। मजबूरन उन्हें जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है।

मेदेपुर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

संवाद सूत्र, अजीतगंज: मंगलवार को विकास खंड जागीर के गांव मेदेपुर निवासी सुल्तान के चार वर्षीय पुत्र सूफियान की मौत हो गई थी। बुधवार को एसीएमओ वाईपी दुबे ने पांच स्दस्यीय टीम के साथ गांव पहुंचकर जांच की। उन्होंने बताया कि इलाज में झोलाछाप ने लापरवाही की है। रिपोर्ट सीएमओ को भेजकर झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जा रहा है। करने के लिए कहा जाएगा। टीम में डॉ. एसएन ¨सह, सतेंद्र यादव, अमित पांडेय, अर¨वद कुमार शामिल रहे। वहीं क्षेत्र के गांव भारापुर में पोलियो अभियान का बहिष्कार दूसरे दिन भी जारी रहा। खंड विकास अधिकारी अनिरुद्ध चौहान ने बुधवार को गांव के लोगों को जल्द विकास कार्य का भरोसा दिलाया, तब जाकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन खत्म किया।