जासं, मैनपुरी: सरकार के सख्त आदेश हैं कि सड़कों पर बेसहारा गोवंश दिखें और न आवारा जानवर। लेकिन, जिला मुख्यालय पर हर एक मुख्य सड़क पर इन्हीं का राज है। कलक्ट्रेट जाने वाली सड़क हो या फिर फोरलेन और जीटी रोड। कागजों पर तो इन्हें पकड़वाया जा रहा है, लेकिन हकीकत में ये हादसों का सबब बने हुए हैं।

शहर के पाल नगर निवासी प्रवीन शिकोहाबाद से बाइक से वापस लौट रहे थे। घिरोर-भारौल के बीच सड़कों पर बैठे बेसहारा गोवंश को न देख सके। बाइक अनियंत्रित होकर फिसली, जिससे वे चोटिल हो गए। देवपुरा निवासी रवि कुमार सैफई अस्पताल से बाइक से लौट रहे थे। करहल से आगे सड़क पर बैठे गोवंशों की वजह से बाइक फिसलने से चोट लगी थी। आए दिन ऐसे हादसे हो रहे हैं। असल में बेसहारा गोवंशों और आवारा जानवरों को पकड़वाने के लिए अब तक कोई प्रयास नहीं किया गया।

शहर में जेल रोड, कुरावली रोड, राधा रमन रोड, ईशन नदी तिराहा, कचहरी रोड, स्टेशन रोड, रेलवे स्टेशन रोड, भांवत चौराहा, देवी रोड सहित दर्जनों स्थानों पर बेसहारा गोवंश की चहलकदमी रहती है। इनकी वजह से कभी जाम तो कभी दुर्घटनाएं होती हैं।

पालिका और पुलिस की है जिम्मेदारी: शहर में बेसहारा गोवंश को पकड़वाकर गोशाला में भिजवाने की संयुक्त जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद और पुलिस की है। वहीं आवारा जानवरों को पकड़वाने का जिम्मा पालिका प्रशासन का है। लेकिन, दोनों ही जिम्मेदारों द्वारा सिर्फ कागजों पर गुडवर्क किया जा रहा है।

कैटल कैचर का प्रयोग ही नहीं हुआ: नगर पालिका प्रशासन ने आवारा जानवरों को पकड़वाने के लिए लगभग चार लाख रुपये की लागत से कैटल कैचर वाहन खरीदा था, लेकिन आज तक इसका प्रयोग ही नहीं किया गया। बाद में इस वाहन की बनावट से छेड़छाड़ कराकर इसे फॉगिग मशीन में तब्दील करा दिया गया।

Posted By: Jagran

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