चौहान काल से जुड़ी पारंपरिक तारकशी कला, उत्कृष्ट कारीगरी को विश्व फलक तक पहुंचा रहे मैनपुरी के युवा गौरव शाक्य
मैनपुरी की पारंपरिक तारकशी कला, जो चौहान काल से जुड़ी है, युवा गौरव शाक्य के प्रयासों से ऑनलाइन माध्यमों से विदेशों तक पहुंच रही है।
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तारकशी से बनाई भगवान गणेश की आकर्षक तस्वीर और शीशम की लकड़ी पर तारकशी की कारीगरी उकेरते हुए गौरव शाक्य। जागरण
HighLights
चौहान कालीन तारकशी कला लकड़ी पर पीतल-तांबे की जड़ाई।
गौरव शाक्य ने ऑनलाइन प्लेटफार्म से कला को विदेशों तक पहुंचाया।
'एक जनपद एक उत्पाद' से 1000 से अधिक लोगों को मिला रोजगार।
चंद्रशेखर गौड़, मैनपुरी। जनपद की ऐतिहासिक कला तारकशी आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। चौहान काल से जुड़ी यह पारंपरिक कला लकड़ी पर पीतल और तांबे की महीन तारों की जड़ाई के लिए जानी जाती है, जो इसकी बेजोड़ खूबसूरती और उत्कृष्ट कारीगरी को दर्शाती है।
प्रदेश सरकार की ओर से ‘एक जनपद एक उत्पाद’ के तहत तारकशी का चयन होने के बाद जनपद में इसका विस्तार हुआ है। यही कारण है कि जनपद के एक होनहार युवा गौरव शाक्य ने इस कला को अपनाकर विश्व फलक तक पहुंचाया है। वह विभिन्न प्लेटफार्म के माध्यम से अपनी विधा को प्राेडक्ट में उतारकर विश्व के विभिन्न हिस्सों में भेज रहे हैं। पहले जहां जिले में चंद लोग इससे जुड़े थे, वहीं अब 1000 से अधिक लोग तारकशी से जुड़कर रोजगार कर रहे हैं।
हुनरमंद हाथों को मिला रोजगार
शहर के देवपुरा में संचालित तारकशी प्रशिक्षण केंद्र के संचालक नेमीचंद्र शाक्य बताते हैं कि तारकशी अब हुनरमंद हाथों को रोजगार दिलाने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इस काम में मेहनत और लागत अधिक है। जबकि उतना पारिश्रमिक नहीं मिल पाता है। खरीदार महंगा होने के कारण कम खरीदते हैं लेकिन शौकीन खरीदते हैं।
उन्होंने बताया कि पुत्र गौरव शाक्य ने अब इसी काम को अपना लिया है। वह पारंपरिक हुनर को आधुनिकता के माहौल में बढ़ाकर इस काम को विदेश तक ले गए हैं। गौरव शाक्य ने बताया कि तारकशी का काम परिवार में काफी समय पहले से हो रहा है तो इसकी बचपन से ही जानकारी थी। पढ़ लिखकर कहीं और नौकरी करने की जगह इसी काम को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। 2019 में पिताजी के साथ काम शुरू किया।
2022 में प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। बताया कि पहले धार्मिक चित्रों को अधिक बनाया जाता था लेकिन उन्होंने इसमें थोड़ा बदलाव किया है। अब वह ज्वेलरी बाक्स, नेम प्लेट, फर्नीचर और होम डेकोर आइटम भी बना रहे हैं। टी कोस्टर, लैपटाप स्टैंड, कैंडल स्टैंड पर भी काम चल रहा है। जल्द ही इसे भी मार्केट में उतारा जाएगा।
ऐसे होती है तारकशी
नेमीचंद्र शाक्य बताते हैं कि तारकशी एक अत्यंत प्राचीन कला है। इसमें पीतल के तारों से शीशम की लकड़ी पर कारीगरी की जाती है। इस कला से जब कोई प्रतिमा बनकर तैयारी होती है तो लोग बस देखते ही रह जाते हैं। ये कला मैनपुरी के अलावा कहीं और देखने को नहीं मिलती है।
ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से विदेशों तक पहुंची तारकशी गौरव शाक्य ने बताया कि वह और उनके पापा इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में जाते रहते हैं। वह जर्मनी, न्यूयार्क, हांगकांग, साउथ कोरिया जा चुके हैं। उन्होंने अपने प्रोडक्ट बेचने के लिए अमेजान, मेमेराकी रिटेल, देशरूट आदि प्लेटफार्म पर अपना पंजीकरण कराया हुआ है। इनके माध्यम से उनकी कला विदेशों के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रही है।
तीन वर्ष में वितरित हुआ 9.08 करोड़ रुपये का ऋण
उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र डा. बनवारी लाल ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत जरी जरदोजी एवं तारकशी में जिला उद्योग केंद्र द्वारा इच्छुक आवेदकों को ऋण मुहैया कराया जाता है। गत तीन वर्षों में 119 लाभार्थियों को करीब 9.08 करोड़ रुपये ऋण वितरित किया गया है।
तारकशी के लिए मिल रहा प्रशिक्षण तारकशी को बढ़ावा देने के लिए जिला उद्योग केंद्र प्रशिक्षण दे रहा है। इसके लिए अभी आवेदकों के साक्षात्कार हो रहे हैं। इसके बाद चयनित 150 लोगों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। आवेदकों में काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं।
तारकशी से जुड़े कारीगरों को हर संभव मदद दी जा रही है। वहीं, तारकशी को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को भी जोड़ा जा रहा है। कोई भी व्यक्ति तारकशी से जुड़ने के लिए जिला उद्योग केंद्र में संपर्क कर सकता है। रोजगार मिलने से जिले में मुफलिसी कम होगी। साथ ही बेरोजगारों को रोजगार भी मिलेगा।
-डाॅ. बनवारी लाल, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र।
