जागरण संवाददाता, मैनपुरी : जिला अस्पताल खुद ही बीमार है। न तो चिकित्सक हैं और न ही दवाएं। चाहे पेट का दर्द हो या फिर कोई दूसरा मर्ज, पैरासिटामोल की टेबलेट पकड़ाकर मरीजों को टरकाया दिया जाता है।

सोमवार को जिला अस्पताल के हालात बदतर दिखे। ओपीडी की व्यवस्थाएं ढेर नजर आईं। बंशीगौहरा निवासी मिजाजी लाल (72) पेट और सीने के दर्द से परेशान थे। पर्चा बनवाने के बाद कर्मचारियों ने उन्हें घंटे भर तक एक कमरे से दूसरे कमरे तक भटकाया लेकिन उपचार नहीं मिला। अंत में कमरा नंबर दो में बैठे स्टाफ ने पैरासिटामोल की टेबलेट लिखकर टरका दिया। वो बार-बार कहते रहे कि उन्हें गलत दवा दी गई है लेकिन किसी ने नहीं सुनी। वहीं, दन्नाहार थाना क्षेत्र के गांव लालपुर सथिनी निवासी छविनाथ ¨सह (62) को पेट में आवारा सांड ने सींग मार दिया था। दर्द से छटपटाते बुजुर्ग को लेकर परिजन इमरजेंसी से लेकर ऑपरेशन थियेटर तक दौड़ लगाते रहे, लेकिन उपचार नहीं मिला। अंत में प्राइवेट अस्पताल ले गए।

प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि मामला गंभीर है। मरीजों के उपचार में यदि लापरवाही बरती गई तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। खाना खाता रहा नर्सिंग स्टाफ, छटपटाते रहे मरीज

सेफ वार्ड में कस्बा भोगांव निवासी अंशू (8) को टायफाइड के उपचार को भर्ती है। एक ही बिस्तर पर दो-दो बच्चों को लिटाया गया था। अंशू को ड्रिप लगाकर जिम्मेदार चले गए। अचानक दवा बंद हो गई। 15 मिनट तक परिजन नर्सों से गुहार लगाते रहे लेकिन नर्सों ने अनसुना कर दिया। बाद में दबाव बनने पर उपचार शुरू किया। थोड़ी देर बाद वार्ड में भर्ती एक महिला के हाथ में लगी ड्रिप ¨खच गई और खून बहता रहा। लगभग पांच मिनट बाद जब परिजनों ने ड्यूटी रूम में सूचना दी तब नर्सों ने संज्ञान लिया।

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