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मैनपुरी फोरलेन घोटाले में तीन पूर्व एक्सईएन पर मुकदमा दर्ज, करोड़ों की वित्तीय धांधली आई सामने

By Digital Desk Edited By: Prateek Gupta
Published: Thu, 01 Oct 2026 11:17 AM (GMT+05:30)

मैनपुरी में शिकोहाबाद-भोगांव राज्यमार्ग के फोरलेन निर्माण में वित्तीय अनियमितता के आरोप में लोक निर्माण विभाग के तीन तत्कालीन अधिशासी ...और पढ़ें

मैनपुरी में पीडब्ल्यूडी कार्यालय।

मैनपुरी में पीडब्ल्यूडी कार्यालय।

जागरण संवाददाता, मैनपुरी। शिकोहाबाद-भोगांव राज्यमार्ग संख्या-84 पर फोरलेन के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण में 10 वर्ष पूर्व कराए गए निर्माण कार्य में लोक निर्माण विभाग के दो अलग खंड के तीन तत्कालीन अधिशासी अभियंताओं ने बड़ी वित्तीय अनियमितता बरती। लंबे समय तक चली जांच में सरकारी धनराशि के मनमाने व्यय में अब वर्तमान अधिशासी अभियंताओं ने तत्कालीन तीन अधिशासी अभियंताओं के विरुद्ध कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है।

तत्कालीन सपा सरकार में वर्ष 2016 में शिकोहाबाद-भोगांव राज्यमार्ग एवं घिरोर बाइपास के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य स्वीकृत हुआ था। 37.86 किमी लंबे मार्ग पर कार्य के लिए शासन ने 29.244 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की थी। आदेश थे कि कोई भी अतिरिक्त कार्य व्यय समिति के पूर्वानुमोदन के बिना नहीं कराए जाएंगे।

इस कार्य का हिस्सा लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड और निर्माण खंड-तृतीय के अंतर्गत आ रहा था। ऐसे में दोनों खंड के अधिशासी अभियंताओं की देखरेख में कार्य कराए गए। वर्तमान अधिशासी अभियंता निर्माण खंड-तृतीय धनुषधारी ने खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अजय कुमार के विरुद्ध बुधवार दोपहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज करा दी।

प्राथमिकी में बताया कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने बिना व्ययाधिक्य स्वीकृति के मनमाने ढंग से वित्तीय खर्च किए। ठेकेदारों से मिलकर शर्त व आदेशों की अनदेखी कर अतिरिक्त कार्य में तटबंध, पहुंच मार्ग में मिट्टी, पाइप व आरसीसी पुलिया एवं नाली निर्माण सिर्फ कराए ही नहीं, इनके देयक भी तैयार किए। इस कार्य में इनके द्वारा 1.17 करोड़ रुपये की मनमानी देनदारियां सृजित की गईं। ठेकेदारों को उनके काम का भुगतान तक नहीं किया गया।

दूसरी ओर वर्तमान अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड अखिलेश्वर कुमार अरुण ने तत्कालीन अधिशासी अभियंता अनिल कुमार एवं वीरेंद्र कुमार के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उक्त स्वीकृत परियोजना में दोनों तत्कालीन अधिशासी अभियंताओं द्वारा 7.99 करोड़ रुपये का अनियमित कार्य कराकर 2.96 करोड़ रुपये अधिक का भुगतान किया और 5.02 करोड़ रुपये की देनदारियां सृजित कर दीं।

उन्होंने बताया है कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता वीरेंद्र कुमार ने वास्तविक लागत 1.13 करोड़ रुपये का अनियमित कार्य करा पूरी धनराशि का भुगतान कर दिया। दोनों तत्कालीन अधिशासी अभियंताओं ने बिना वित्तीय प्रविधान के देयक तैयार कर धनराशि का भुगतान किया था। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

शासन की जांच में खुला खेल

नियम है कि निर्माण के तीन माह के अंदर जांच की रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करनी पड़ती है। उस समय काम करने वाले ठेकेदारों ने भुगतान न किए जाने की शिकायत उच्चाधिकारियों से की थी। शासन द्वारा लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अलीगढ़ क्षेत्र को जांच अधिकारी बनाया गया था।

उन्होंने गोपनीय जांच कराई थी, जिसमें तत्कालीन अधिशासी अभियंताओं के स्तर से कोई उत्तर दिए गए औरे न ही अभिलेख उपलब्ध कराए गए। शासन से आदेश के बाद इनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।