जासं, मैनपुरी: बुजुर्गों की आड़ में बड़ा गोलमाल सामने आया है। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह ने औचक निरीक्षण किया तो संस्था की पोल खुल गई। जिन मानकों के नाम पर शासन से सरकारी मदद ली जा रही थी, निरीक्षण में वह एक भी पूरा नहीं मिला। उपाध्यक्ष के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने सभी अभिलेखों को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। जांच के लिए टीम का गठन किया गया है।

गुरुवार को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष जेल रोड पर स्थित आदर्श भगवती शिक्षा सेवा संस्था द्वारा संचालित वृद्धाश्रम पर पहुंचीं। यहां खामियां देख वह हैरान रह गईं। उन्होंने कहा कि भवन किराए के नाम पर 90 हजार रुपये प्रतिमाह, प्रति बुजुर्ग फल और मिष्ठान के लिए 70 रुपये की धनराशि शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है। भवन 90 हजार रुपये मासिक किराए लायक ही नहीं है। इसके अलावा बिजली, टेलीफोन, जेनरेटर की सुविधा भी शासन से दिलाई जा रही हैं, लेकिन यहां उनका भी अभाव है।

किरायानामा में आठ कमरे दर्शाए गए हैं, लेकिन यहां सिर्फ छह ही हैं। शौचालय की संख्या का कोई जिक्र ही नहीं किया गया है। रसोई घर नहीं है। 16 कर्मचारियों के तैनाती का लिखित में दस्तावेज दिए हैं, लेकिन आधा दर्जन कर्मचारी भी नहीं हैं। बुजुर्गों को जिस कमरे में रखा जा रहा है, उसमें दुर्गंध आती है। खाना तक मेन्यू के हिसाब से नहीं दिया जा रहा है। शौचालयों में लाइट तक नहीं है। गर्म पानी के लिए गीजर होना बताया था, लेकिन वह भी नहीं है।

कूटरचित अभिलेखों से सुविधा लेने की बात करते हुए उन्होंने वृद्धाश्रम के सभी दस्तावेज जब्त करने के लिए एसडीएम रजनीकांत और कोतवाली प्रभारी पीआर शर्मा को निर्देश दिए हैं। वृद्धाश्रम की जांच के लिए टीम का गठन करने को कहा है। भोगांव के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में भी सुरक्षा के लिए फेसिग के प्रबंध कराने के निर्देश दिए हैं।

Posted By: Jagran

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