मैनपुरी [दिलीप शर्मा]। यह मैनपुरी पुलिस है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद भी नहीं सुधर रही है। छात्रा से दुष्कर्म के बाद हत्या केस में शुरुआती दौर से लापरवाही बरत रही पुलिस ने ताजा लापरवाही तीन छात्रों सहित पांच लोगों के पॉलीग्राफी टेस्ट कराने को लेकर बरती है। विधिक अनुमति लिए बिना ही पुलिस उन्हें लेकर सोमवार को लखनऊ पहुंच गई, अनुमति न होने की वजह से वहां से वापस लौटा दिया गया। लिहाजा, हत्याकांड अभी भी रहस्य ही बना हुआ है। 

15-16 सितंबर की दरम्यानी रात को स्कूल के हॉस्टल में 11वीं कक्षा की छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। मामले में ढिलाई पर शासन ने रविवार को एसपी अजय शंकर राय को और सोमवार को डीएम पीके उपाध्याय को हटा दिया। शासन ने एसआइटी गठित कर दी। इसके बाद भी जांच में लापरवाही बरती जा रही है। रविवार को एसआइटी गठित होते ही पुलिस ने मामले में नामजद वार्डन विश्रुति कुमारी, तीन छात्र और शिक्षक डीपी सिंह को निगरानी में ले लिया था।

डीएनए जांच के लिए सोमवार सुबह जिला अस्पताल में शिक्षक और तीनों छात्रों के रक्त के नमूने लिए गए। फिर वार्डन सहित पांचों को पॉलीग्राफी टेस्ट कराने के लिए लखनऊ ले गई। लखनऊ में पुलिस से इस टेस्ट के लिए विधिक अनुमति की प्रति मांगी गई। मैनपुरी पुलिस ने केवल आरोपितों की लिखित सहमति पेश कर दी, जिसे नकार दिया गया। इस टेस्ट के लिए अदालत से अनुमति पत्र लाने की कहकर मैनपुरी पुलिस को लौटा दिया गया। ये टीम पांचों को लेकर सोमवार आधी रात के बाद मैनपुरी आ गई।

मंगलवार को उच्चाधिकारियों ने मैनपुरी पुलिस को इस लापरवाही पर फटकार लगाई। इसके बाद अनुमति की प्रक्रिया शुरू कराई गई। मंगलवार को दिनभर अनुमति लेने के लिए पुलिस जुटी रही। सीओ भोगांव प्रयांक जैन ने बताया कि अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। सोमवार को आरोपितों को दूसरे कार्य से लखनऊ ले जाया गया था।

पॉलीग्राफी टेस्ट के लिए यह है प्रक्रिया

पॉलीग्राफी टेस्ट के लिए संबंधित वयस्क व्यक्ति और यदि कोई नाबालिग है तो उसके अभिभावक की लिखित सहमति आवश्यक है। फिर संबंधित थाना पुलिस अदालत में अनुमति के लिए प्रार्थना पत्र देती है। अदालत लिखित सहमति के आधार पर अनुमति दे सकती है। आवश्यक लगने पर संबंधित व्यक्ति को अपने समक्ष बुलाकर अदालत सहमति के संबंध में पुष्टि भी कर सकती है।

कई दिन लग जाएंगे पॉलीग्राफी टेस्ट में

लखनऊ फॉरेंसिक लैब के अधिकारियों ने मैनपुरी पुलिस को यह भी स्पष्ट कर दिया कि एक दिन में टेस्ट नहीं हो सकता। पहले पूरी प्रश्नावली तैयार करनी होगी। फिर जब यहां से कहा जाए, तब एक-एक करके आरोपितों का पॉलीग्राफी टेस्ट होगा। इसमें कई दिनों का वक्त लगना तय है।

डीएनए टेस्ट के लिए लखनऊ एफएसएल पहुंचे नमूने

मैनपुरी में छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में डीएनए परीक्षण के लिए कई नमूने लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजे गए हैं। इनमें पांचों संदिग्धों के खून के सैंपल भी शामिल हैं। केस की गंभीरता को देखते हुए डीएनए टेस्ट रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराये जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। मैनपुरी पुलिस ने डीएनए टेस्ट के लिए करीब 12 नमूने एफएसएल, लखनऊ भेजे हैं। सूत्रों का कहना है कि छात्रा के कपड़ों व स्लाइड के अलावा कुछ अन्य नमूनों को भेजा गया है। पांचों संदिग्धों के नमूने भी भेजे गए हैं। डीएनए टेस्ट से कई अहम साक्ष्य सामने आएंगे।

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