जासं, मैनपुरी : एक तो कोविड का खतरा उस पर बदलते मौसम में आंखों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। रोजाना कंजक्टिवाइटिस व ड्राइनेस के मरीज उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों द्वारा सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

शहर की आवास विकास कालोनी स्थित कमला नेत्र चिकित्सालय के नेत्र रोग चिकित्सक डा. अभिषेक यादव का कहना है कि मानसून की नमी हमारी त्वचा को तो नुकसान पहुंचाती ही है साथ ही आंखों पर भी विपरीत प्रभाव डालती है। बारिश के पानी के आंखों में जाने से कई प्रकार के इन्फेक्शन हो सकते हैं। बारिश और नमी से कंजक्टिवाइटिस जैसे संक्रमण हो सकते हैं। उनका कहना है कि इन दिनों रोजाना 15 से 20 मरीज इस समस्या से ग्रसित होकर पहुंच रहे हैं। वैसे तो यह मानसूनी संक्रमण है, लेकिन यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैलता है। यह आमतौर पर छूने से फैलता है इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि तौलिए, रूमाल, नैपकिस, तकिए के खोल आदि एक-दूसरे से अलग रखें। अगर फिर भी आपकी आंखें गुलाबी हो जाती हैं तो तत्काल चिकित्सक की सलाह लें।

इसके अलावा गुहेरी या आंखों में फुंसी का होना भी सामान्य बात है। इसमें तेल ग्रंथियां सूख जाती हैं और पलकों पर बैक्टीरिया आने से फुंसी बन जाती हैं। इसमें दोनों पलकें लाल होकर सूज जाती हैं और दर्द होता है। इस रोग को रोकने का सबसे सही तरीका आंखों की साफ-सफाई बनाए रखना है। मृत कोशिकाएं हटाने के लिए पलकों को बहुत ही नरमी से साफ करना चाहिए। ऐसे करें बचाव

- आंखों को हाथों से बार-बार छूने से बचें।

- घर से बाहर निकलते समय चश्मा का प्रयोग करें।

-गंदे तौलिए और एक-दूसरे के इस्तेमाल सामान का उपयोग न करें।

- आंखों को नम बनाए रखें और कास्मेटिक सामान से बचें।

- समस्या होने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें।

Edited By: Jagran