जासं, मैनपुरी: बीमारी और कुपोषण अब भी समाज की मुश्किल बना हुआ है। गरीबों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने को निश्शुल्क राशन वितरण से लेकर सुपोषण योजना तक कोशिश चल रही हैं। परंतु कहीं गड़बड़ी का खेल तो कहीं जानकारी का अभाव, अब भी समस्या को बरकरार रखे हैं। मुनाफाखोरों की मिलावट का खेल भी खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य में बाधा बना हुआ है।

खाद्य सुरक्षा का सबसे बड़ा संकट कोरोना काल से अब तक बरकरार है। इसके निदान के लिए सरकार और समाजसेवी, दोनों आगे आएं।

अब राज्य और केंद्र सरकार की ओर से माह में दो बार अंत्योदय परिवारों को कार्ड और पात्र गृहस्थी को यूनिट से गेहूं- चावल बांटा जा रहा है। जिसमें एक माह में एक बार नकद और दूसरी बार यह निश्शुल्क दिया जा रहा है। जिले में वर्तमान में प्रतिमाह 57 हजार 148 कुंतल राशन का वितरण हो रहा है। वहीं कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि राशन वितरण में अपात्रों की सेंध और पौष्टिक आहार वितरण में गड़बड़ी के मामले जब-तब सामने आते रहते हैं।

आंकड़ों पर एक नजर

-269024 पात्र गृहस्थी कार्ड हैं जिले में

- 1091666 लोग प्रतिमाह पात्र गृहस्थी कार्ड से ले रहे हैं राशन

- 45604 अंत्योदय राशन कार्ड हैं जिले में

- 135960 लोग अंत्योदय राशन कार्ड से ले प्रतिमाह ले रहे हैं राशन सुपोषण दे रहा गोवंश

जिले में पांच हजार से अधिक कुपोषित बच्चों के सुपोषण को सीएम गो पालन संरक्षण योजना भी सुपोषण का भाव जगा रही है। परिवार गो पालन कर सरकार से प्रतिमाह नौ सौ रुपया भरण-पोषण को ले रहे हैं तो दूध से ऐसे बच्चों की सेहत बना रहे हैं।

जागरूकता की जरूरत

जिला अस्पताल के सीएमएस डा. अरविद कुमार गर्ग का कहना है कि कुपोषण पर सरकारी योजनाएं असर दिखा रही हैं। परंतु लोगों का जागरूक होना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। डाइट चार्ट का पालन करें। फल आदि भोजन में शामिल करें। कुपोषित बच्चों को अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराएं।

खाद्य सुरक्षा के लिए ही अंत्योदय और पात्र गृहस्थी कार्ड धारकों को माह में दो बार राशन बांटा जा रहा है। खाद्य योजना का लाभ लेने को कोई भी पात्र नागरिक राशन कार्ड बना सकता है। - मोहम्मद कयामुद्दीन अंसारी, जिला पूर्ति अधिकारी।

Edited By: Jagran