जागरण संवाददाता, मैनपुरी: बेटी की मौत से आहत और आक्रोशित माता-पिता ने न्याय के लिए क्या-क्या नहीं किया। तहरीर का दस्तूर निभाया, रिपोर्ट दर्ज होने के बाद आरोपितों को कानून के शिकंजे में कसने के लिए अफसरों से गिड़गिड़ाते रहे। दफ्तरों में चकरघिन्नी बने रहे। जांच में लापरवाही और गुहार की नजरअंदाजी से व्यथित भूख हड़ताल पर भी बैठे। अफसरों ने सीबीआइ जांच का भरोसा दिलाकर अनशन स्थगित करा दिया गया। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद तसल्ली हुई मगर, सिस्टम अपने ढर्रे से ही चला। छात्रा के माता-पिता को हाई कोर्ट के सख्त तेवर और स्पष्ट आदेश के बाद न्याय की उम्मीद तो जगी है मगर, सीबीआइ जांच की मांग जारी रखेंगे।

बेटी की मौत के साथ ही माता-पिता के संघर्ष का दौर शुरू हो गया था। सबसे ज्यादा गुस्सा तो इस बात है कि उन्हें विद्यालय प्रशासन या पुलिस ने घटना की सूचना ही नहीं दी थी। इमरजेंसी में शव को देख एक रिश्तेदार के जरिए उन्हें जानकारी दी थी। पुलिस का रवैया ठीक प्रतीत नहीं हुआ तो स्वजन ने पुलिस पर भरोसा न होने की बात कहकर सीबीआइ से जांच कराने की मांग की। घटना के सातवें दिन माता-पिता नगर पालिका परिसर में भूख हड़ताल पर बैठ गए। इस पर डीएम ने मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश कर दिया। स्वजन ने इससे भी असंतुष्टि जताई तो जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। परंतु स्वजन सीबीआइ जांच की मांग पर अड़े रहे। अनशन के तीसरे दिन डीएम ने सीबीआइ जांच की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र भेजा। सीबीआइ जांच का आश्वासन देकर अनशन समाप्त कराया गया। लेकिन जांच सीबीआइ को नहीं सौंपी गई। मां की याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन

पीड़ित माता-पिता प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी से लखनऊ जाकर मिले। मुख्यमंत्री से मिलकर भी गुहार लगाई। इसी बीच गठित एसआइटी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची तो मां ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी। याचिका अभी विचाराधीन है।

हमसे खुदकुशी की बात को मानने को कहा जाता रहा। मेरी बेटी बहुत हिम्मत वाली थी। वो गलत बात सहन नहीं करती थी। वो खुदकुशी नहीं कर सकती। हत्यारों को बचाने के लिए मामला बनाया गया। जांच प्रगति की जानकारी पर हमें पुलिस और एसटीएफ के बीच फुटबाल बना दिया। कोई हमारी सुनने को तैयार ही नहीं था। सब अपनी कहानी को सही साबित करना चाहते थे। हाई कोर्ट के आदेश से न्याय की उम्मीद तो जगी है मगर, सीबीआइ जांच होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

(छात्रा की मां ने जैसा 'जागरण' को फोन पर बताया)

संघर्ष का सफर

16 सितंबर 2019 को प्रात: हास्टल में झूलता मिला शव

16 सितंबर 2019 की रात दो बजे एफआइआर

18 सितंबर 2019 को स्वजन की सीबीआइ जांच की मांग

23 सितंबर 2019 को माता-पिता भूख हड़ताल पर बैठे

24 सितंबर 2019 को डीएम ने सीबीआइ जांच की संस्तुति की

25 सितंबर 2019 की सुबह माता-पिता ने भूख हड़ताल स्थगित की

25 सितंबर 2019 को एसटीएफ से जांच कराने का निर्णय

27 सितंबर 2019 को प्रदेश सरकार ने सीबीआइ जांच की संस्तुति की

15 अक्टूबर 2019 को प्रमुख सचिव से मिले माता-पिता

16 अक्टूबर 2019 को पुलिस महानिदेशक से मिलकर मांगा न्याय

19 नवंबर 2019 पूर्व मंत्री जतिन प्रसाद आकर माता-पिता से मिले

28 नवंबर 2019 को प्रियंका गांधी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

01 दिसंबर 2019 को जांच के लिए एसआइटी गठित

01 दिसंबर 2019 एसपी अजय शंकर राय का तबादला

02 दिसंबर 2019 डीएम पीके उपाध्याय स्थानांतरित

14 फरवरी 2020 को माता-पिता सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले

27 नवंबर 2020 को माता-पिता ने हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की।

Edited By: Jagran