मैनपुरी, किशनी: नगर में लोगों को गला तर करने के लिए भटकना पड़ता है। अगर किसी राहगीर को प्यास बुझाने के लिए पानी चाहिए हो तो उसे दुकान से खरीदकर ही पानी पीना पड़ता है। हाल ये है कि नगर के अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं, जिसके कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विधूना चौराहा नगर का मुख्य स्थान है। यहां से विधूना, इटावा, मैनपुरी, करहल और बेवर आने जाने वाले सैकड़ों लोग रोजाना गुजरते हैं। अगर कोई राहगीर यहां रुककर अपना गला तर करना चाहता है तो इसके लिए यहां कोई इंतजाम नहीं है। कहने को तो यहां तीन हैंडपंप लगे हुए हैं, लेकिन ये सभी हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। बसों के लिए भी लोग यहां इंतजार करते हैं, इन्हें अगर प्यास लगती है तो उन्हें दुकान से 20 रुपये की बोतल खरीदकर पानी पीना पड़ता है। लेकिन आखिर वे कर भी क्या सकते हैं। कई बार लोगों ने हैंडपंप रीबोर कराए जाने की मांग की, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। नगर का हाल भी खराब है। भूगर्भ जल स्तर घटने के चलते घरों में लगे हैंडपंप भी पानी नहीं देते हैं। ऐसे में घर में पीने के लिए भी पानी खरीदना पड़ता है।

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लोगों की बात

कई बार हैंडपंप सही कराने के लिए जनप्रतिनिधियों से कहा गया। लेकिन आज तक किसी ने भी न तो हैंडपंप सही कराए और न ही नए हैंडपंप स्थापित कराए।

ब्रह्मानंद कश्यप। बस स्टैंड व चौराहों पर इंतजार करने वाले लोगों को खरीदकर पानी पीना पड़ता है। अगर सभी हैंडपंप सही करा दिए जाएं तो लोगों के साथ-साथ राहगीरों को भी राहत मिल जाए।

राजमणि ¨सह चौहान। हैंडपंप सही कराने के लिए संपूर्ण समाधान दिवस में भी लोगों ने प्रार्थना पत्र दिया था। लेकिन केवल कागजों में शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।

शिवम गुप्ता। गर्मियों में लोगों को पानी की अधिक जरूरत होती है। लेकिन नगर में अधिकांश हैंडपंप खराब होने के कारण इस बार लोगों को परेशानी होगी। लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं।

नंदू कश्यप।

बच्चे बोले, जल ही जीवन तो क्यों न बचाएं-पानी की बर्बादी रोकने की ली सामूहिक शपथ-दूसरों को भी जागरूक करने का लिया संकल्प फोटो नंबर 4मेन2,3,4,5,6जेपीजी

जागरण संवाददाता, मैनपुरी: दैनिक जागरण के जल जागरण अभियान का कारवां अब बढ़ता जा रहा है। बुधवार को भोजपुरा स्थित रजनीश कॉन्वेंट स्कूल में बच्चों ने सामूहिक रूप से पानी बचाने की शपथ ली। बच्चों ने कहा कि जब हम जानते हैं कि जल ही जीवन है, फिर इसे बर्बाद क्यों कर रहे हैं। बच्चों ने न केवल खुद पानी बचाने का संकल्प लिया, बल्कि बड़ों को भी इसके लिए जागरूक करने की बात कही। विद्यालय के शिक्षक चतुर्भुज ¨सह चौहान ने कहा कि प्रतिदिन हम बीस से तीस फीसद पानी बर्बाद कर देते हैं। यहां तक कि बारिश का पानी हम सहेज सकते हैं, लेकिन इसे लेकर कतई गंभीर नहीं हैं। ऐसे में बारिश का पानी सड़कों पर बह जाता है। यदि यही पानी हम सहेंजे तो निश्चित ही जल संकट से निजात मिल सकती है। इस दौरान रजनीश कुमार, शिवेंद्र ¨सह चौहान, रामेंद्र ¨सह चौहान, कोमल, अंजलि, प्रीति, मोनी, रागिनी, शशि, निधि, विनोद कुमार, शिवशंकर, नितिन मौजूद रहे।

क्या कहते हैं बच्चे

हमारा भी फर्ज है कि पानी बचाने के लिए हम संकल्प लें। हम यदि इसका सामूहिक संकल्प लें तो निश्चित ही पानी के संकट से निजात मिल जाएगी।

शिल्पी, कक्षा नौ। हमें इसके लिए अभी से सचेत हो जाना है। काफी पानी पाइप लाइन लीकेज होने और नलों की टोटी खराब होने से ही बह जाता है। इसके लिए हमें खुद भी गंभीर होना होगा। नंदनी, कक्षा नौ।

पानी के लिए प्रयास बेहद जरूरी हैं, जब तक इसके लिए हम जागरूक नहीं होंगे, तब तक बात नहीं बनेगी। हर व्यक्ति को इस पहल के लिए खुद ही आगे आना होगा। सागर, कक्षा नौ।

जरूरी है कि पानी के संकट से निजात मिले। भूजलस्तर लगातार घटता जा रहा है। यही कारण है कि घरों में लगे हैंडपंप भी साथ छोड़ रहे हैं। बारिश का पानी सहेजने को हम बड़ों को जागरूक करेंगे।

शिवांग, कक्षा आठक्या कहते हैं बच्चे

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