संवाद सूत्र, भोगांव: कृषि मंडी सालों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। मंडी में भले ही हर रोज लाखों का कारोबार होता हो, परंतु किसानों और आढ़तियों के लिए यहां सुविधाएं शून्य हैं। पेयजल, विश्राम, शौचालय जैसे इंतजाम तक नहीं हैं। टूटी सड़कें यहां की पहचान है तो शाम ढलने के बाद अंधेरा छा जाता है। इससे यहां अराजकतत्व सक्रिय रहते हैं। कई बार इस ओर मांग उठाई, मगर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

नगर के मैनपुरी रोड पर बनी नवीन उप मंडी में आने वाले किसानों को परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। दूरदराज से आने वाले किसानों के लिए बैठने के लिए पूरी मंडी में कहीं कोई व्यवस्था नहीं। किसानों को पानी भी अपने साथ लेकर आना पड़ता है। मंडी परिसर में आढ़तियों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त दुकानें नहीं हैं। ऐसे में बहुत से आढ़तियों ने नीलामी चबूतरों पर कब्जा जमा रखा है और वहीं से कारोबार कर रहे हैं। मंडी प्रशासन की उदासीनता के चलते परिसर में बने आवासीय भवन, प्रशासनिक भवन जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है।

185 आढ़तियों पर मात्र 70 दुकानें

मंडी परिषद में उप मंडी स्थल के लिए 185 आढ़तियों के लाइसेंस जारी किए हैं। परंतु उप मंडी में मात्र 70 दुकानों निर्माण कराया है। अधिकारियों को शेष लाइसेंस धारक आढ़तियों के लिए दुकानें बनवानी चहिए।

छेदालाल वर्मा, पूर्व अध्यक्ष आढ़ती संघ

उप मंडी के विद्युत कनेक्शन को जुड़वाने की मांग: मंडी परिषद को उप मंडी स्थल पर किसानों व आढ़तियों के लिए मूलभूत सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए। लगभग 3 वर्ष से कटे विद्युत कनेक्शन को जुड़वाना चाहिए। जगदीश, आढ़ती

किसानों को नहीं मिल पा रहा उपज का लाभकारी मूल्य: अधिकारियों की उदासीनता के कारण उप मंडी में किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है। एक मात्र लिपिक के सहारे उप मंडी का संचालन हो रहा है। मिहीलाल, किसान

जलभराव, बेसहारा गोवंश की समस्या: उप मंडी स्थल में किसानों के लिए कोई सुविधा नहीं है। पानी का निकास न होने के कारण बरसात के दिनों में उप मंडी स्थल में व्यापक जल भराव हो जाता है। मंडी के अंदर ही बेसहारा घूमने वाले गोवंश फसल को बर्बाद करते हैं। अतर सिंह, किसान

Posted By: Jagran

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