जासं, महोबा : जिस घर में कुछ दिन पहले बच्चों और बड़ों की खुशहाली की तस्वीर नजर आ रही थी तो कुछ समय बाद ही उसमें मातम का नजारा निगाहों में दिखाई दिया। चित्रकूट में हुए दर्दनाक हादसे का गम परिवार के बचे स्वजन के साथ ही ग्रामीणों को भी जिदगी भर याद रहेगा।

चित्रकूट के रैपुरा थाने के रामनगर के पास ट्रक की टक्कर से ओमनी वैन सवार महोबा जिले के बेलाताल थाना क्षेत्र की ननवारा ग्राम पंचायत के मजरा टपरियन निवासी 38 वर्षीय चरन सिंह, 35 वर्षीय गीता पत्नी चरनू, उनकी सात वर्षीय पुत्री संध्या व 55 वर्षीय शांति की मौत से दो परिवार बिखर गए। जानकारी मिलते ही घर में घायल पड़े सियाराम और फूल सिंह तथा अन्य स्वजन में कोहराम मच गया। सियाराम ने बताया कि वह दिल्ली में पत्नी के साथ रहकर मजदूरी करते थे। 13 अप्रैल को बाइक से पत्नी कमली के साथ गांव आ रहे थे। रात दस बजे के करीब अभी फिरोजाबाद के पास पहुंचे थे कि आंखों के सामने अंधेरा छा गया। बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे नाली में जा घुसी। दोनों लोग बेसुध होकर गंभीर रूप से जख्मी हो गई। इन लोगों के पीछे गांव के ही कुछ और लोग बाइक से आ रहे थे। उन्होंने जब इन दोनों को देखा तो उन्हें फिरोजाबाद में भी भर्ती कराया और घटना की सूचना टपरियन गांव में रह रहे इनके पुत्रों को दी। 14 अप्रैल को इनके पुत्र चरन सिंह, हरी सिंह, चंद्रभान फिरोजाबाद पहुंचे और दोनों लोगों को महोबा ले आए। यहां सियाराम की हालत तो ठीक हो गई लेकिन कमली की झांसी ले जाते समय मौत हो गई थी। बाद में मां का गांव में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

सियाराम के भाई फूल सिंह ने बताया कि फूल विसर्जन के लिए मेरी पत्नी शांति के साथ भतीजा चरन सिंह और उनकी पत्नी गीता तथा पुत्री संध्या के साथ परिवार के अन्य लोग भी गए थे। बच्चों की जिद पर भी साथ नहीं ले गई शांति

सियाराम कहते हैं कि जब प्रयागराज फूल विसर्जन के लिए जाने की तैयारी हो रही थी तो हम भी जाने को तैयार थे लेकिन सभी ने रोक दिया। बाद में तय हुआ कि चलो यह लोग चले जाएं उधर गंगा स्नान भी कर लेंगे। गाड़ी में भीड़ होने से शांति देवी ने अपने तीनों बच्चों में 12 साल की आकांक्षा, नौ साल की हीरादेवी, सात साल के प्रवीन को घर पर ही रुकने की बात कहते हुए रोक दिया था। घटना का पता चलते ही सभी बच्चे चित्रकूट रवाना हो गए।

पूरा परिवार ही चला गया

चरन सिंह गांव में ही पत्नी गीता और पुत्री संध्या के साथ रहता था। यहां खेती आदि करके गुजारा कर रहा था। तीनों की मौत से स्वजन यही चीख-चीख कर विलाप कर रहे थे कि चरन सिंह का पूरा परिवार ही चला गया।

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