जागरण संवाददाता, महोबा : शहर के उपकारागार में तीन दिन पूर्व हत्या के मामले में सजा काट रहे कैदी भूप¨सह राजपूत की संदिग्ध हालात में हुई मौत ने जेल में बंदियों और कैदियों के उत्पीड़न की एक और तस्वीर को उजागर किया है। परिजनों ने जेलर पर हत्या का आरोप लगाया है। हालांकि डीआइजी जेल बीआर वर्मा ने अपनी जांच में कैदी की मौत हार्ट अटैक से होना बताया है। हां उन्होंने इलाज में लापरवाही की बात भी स्वीकार की है। यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पूर्व भी बंदियों और कैदियों पर उप कारागार में कहर बरपता रहा है।

वर्ष 2016 में हत्या के एक मामले में निरुद्ध बंदी ज्योरइया गांव निवासी प्रताप ¨सह ने जेल प्रशासन के उत्पीड़न से आजिज आकर ब्लेड मारकर जान देने की कोशिश की थी। हालांकि समय रहते उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पूछताछ में कैदी ने वसूली और उत्पीड़न की बात बताई थी। फरवरी 2017 की बात करें तो बंदियों के उत्पीड़न के मामले में उप कारागार अधीक्षक पर मुकदमा दर्ज कराया गया था। बता दें कि तब जेलर प्रभुदयाल द्वारा बंदियों से रुपये वसूलने की शिकायत डीएम व एसपी से की गई थी। इससे नाराज जेलर ने बंदी ज्ञान¨सह के साथ मारपीट की थी और वह घायल हुआ था। ज्ञान ¨सह की शिकायत पर अधीक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके पूर्व भी कई और मामले हुए जो कारागार में बंदियों व कैदियों के उत्पीड़न की तस्वीर पेश करते है। वहीं वर्ष 2014 में कारागार में एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था जिसमें जेलर विनय दुबे व डिप्टी जेलर विकास शर्मा की मौजूदगी में बार बालाओं का डांस हुआ था और जमकर नोट बरसे थे। इस मामले में उच्चाधिकारियों ने जेलर व डिप्टी जेलर पर कार्रवाई की थी।

Posted By: Jagran