संवाद सूत्र, भरवारा (महोबा): सोमवार जैसे ही गांव में एक साथ चार शव पहुंचे तो जैसे पूरा गांव चीखों से गूंज उठा। मृतक शांति की बेटियां और बेटे मां का शव देख उसे लिपट गए। मां को वह हिलाए जा रहे थे, बार-बार उठने को कहतीं, बेटियों की हालत देख वहां खड़े स्वजन, पड़ोस के लोग भी बिलख उठे। बड़ी बेटी मां का चेहरे पकड़ कर बोली..मां बस एक बार बोल दै..तुम्हाय हर बात मनिहे। कबहूं बदमाशी नाही करहें। किसी तरह स्वजन को शांत कर चारों शव का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।

टपरियन गांव के चार लोगों की मौत चित्रकूट में प्रयागराज जाते समय सड़क हाजसे में रविवार को हो गई थी। सभी के शव सोमवार को गांव पहुंचे। हादसे में चरन सिंह, उनकी पत्नी गीता, बेटी सात साल की संध्या, व इनकी भाभी शांती की मौत हो गई थी। जैसे ही शव गांव पहुंचे और दरवाजे पर रखे गए तो शांति के तीनों बच्चे दौड़ पड़े। बच्चे कभी मां को जगाने और कभी अलग हटकर एक दूसरे से चिपककर रोते बिलखते रहे। यह ²श्य जिसने भी देखा वह बिना कुछ बोले बस रोए जा रहा था। शांति का पुत्र सात वर्षीय प्रवीन रोते हुए कह रहा था, मां ही उसे खाना पानी देती थी। अब कैसे खाना आऊंगा कौन देगा। शांति की बड़ी पुत्री आकांक्षा व हीरादेवी मां की लाश पर सिर पटकते हुए चिल्लाती रहीं। 55 वर्षीय सियाराम पथराई आंखों से सभी को निहारते हुए दहाड़ मारकर जमीन पर अपना सिर पटक रहे थे। उसके जीवित रहते ही पहले पत्नी ने सहारा छोड़ा फिर पुत्र, बहु व नातिन का सहारा छिन गया। शांति के तीनों बच्चो को उनकी मामी आशा अपने साथ चितहरी गांव ले गईं। गांव में एक साथ चार अर्थी जैसे ही अंतिम संस्कार के लिए उठा कर ले जाई जाने लगीं तो ऐसा लगा जैसे चीखों से जैसे आसमान रो पड़ेगा। शांति के शव का उसके पति फूल सिंह ने अग्नि देकर अंतिम संस्कार किया तो वहीं मृतक चरन सिंह के छोटे भाई चंद्रभान ने अपने भाई चरन सिंह व भाभी गीता व भतीजी संध्या का अंतिम संस्कार किया।

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